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झारखंड में क्रैश हुआ प्लेन था 39 साल पुराना, एक महीने पहले ही बताया गया फिट

रांची के पास क्रैश हुआ बीचक्राफ्ट विमान 39 साल पुराना था। यह अब तक कुल 6600 घंटे की उड़ान भर चुका था। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने हिन्दुस्तान टाइम्स को यह जानकारी दी।

Wed, 25 Feb 2026 03:45 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नेहा एलएम त्रिपाठी, रांची
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झारखंड में क्रैश हुआ प्लेन था 39 साल पुराना, एक महीने पहले ही बताया गया फिट

रांची के पास क्रैश हुआ बीचक्राफ्ट विमान 39 साल पुराना था। यह अब तक कुल 6600 घंटे की उड़ान भर चुका था। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने हिन्दुस्तान टाइम्स को यह जानकारी दी। रविवार रात हुए एयर एंबुलेंस दुर्घटना में सभी 7 लोगों की मौत हो गई। रांची के एक अस्पताल से मरीज को दिल्ली शिफ्ट करने के लिए उस दिन यह विमान उड़ा था जो झारखंड के चतरा में जमीन पर आ गिरा।

जिन लोगों की मौत हुई उनमें मरीज संजय कुमार (41), एक डॉक्टर, एक पैरामेडिकल स्टाफ, दो तीमारदार, 1400 घंटे उड़ान का अनुभव रखने वाले पायलट विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह (450 घंटे उड़ान) शामिल थे। एक अधिकारी ने कहा, 'रेडबर्ड एयरवेज की ओर से संचालित इस बीचक्राफ्ट C90A (किंग एयर) विमान का निर्माण 1987 में हुआ था। यह अब तक कुल 6610 घंटे की उड़ान भर चुका था।' अधिकारी ने जोड़ा कि इन आंकड़ों के मुताबिक, प्लेन का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं हुआ था।

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जनवरी में ही मिला था सर्टिफिकेट

अधिकारी ने कहा, 'इसमें P&W PT6A-21 इंजन लगे हुए थे और इस साल 21 जनवरी को इसे उड़ान के लिए फिट घोषित करते हुए ARC सर्टिफिकेट दिया गया था, जो एक साल के लिए वैलिड था।' विमान ने उस दिन रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम 7:11 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए टेक ऑफ किया था।

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विमान में नहीं था ब्लैक बॉक्स

दूसरे अधिकारी ने बताया कि टेक ऑफ के 23 मिनट बाद विमान का रडार से संपर्क टूट गया। बाद में यह चतरा जिले के सिमरिया के जंगलों में क्रैश हो गया। दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान की क्षमता अधिकतम 4583 किलोग्राम वजन के साथ उड़ान की थी। उन्होंने यह भी बताया कि विमान में ब्लैक बॉक्स, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर नहीं था। एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘इस विमान में सीवीआर, एफडीआर इंस्टॉल नहीं था। इसे पहली बार उड़ान के लिए सर्टिफिकेट 1987 में जारी किया गया था। तब सीवीआर और एफडीआर की कोई अनिवार्यता नहीं थी।’

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