जनजाति संस्कृति समागम का माझी परगना महाल ने किया विरोध, राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
माझी परगना महाल ने 24 मई को नई दिल्ली में होने वाले जनजाति संस्कृति समागम का विरोध किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि यह कार्यक्रम आदिवासी हितों के खिलाफ है और आदिवासी पहचान को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सरना धर्म कोड की मान्यता और पेसा कानून के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की।

माझी परगना महाल ने 24 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले जनजाति संस्कृति समागम का विरोध करते हुए इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताया है। संगठन की ओर से उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की गई। धार दिशोम देश परगना बैजू मुर्मू ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि जनजाति सुरक्षा मंच आदिवासी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग परंपरा, संस्कृति और आस्था है, जिसकी रक्षा आवश्यक है। साथ ही सरना धर्म कोड की मान्यता देने तथा आदिवासियों की भाषा, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और आरक्षण संबंधी अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई।
माझी परगना महाल ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है तथा समाज में भ्रम फैलाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। इसके अलावा संगठन ने उपायुक्त को अलग ज्ञापन सौंपकर पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरिया एक्ट (पेसा) 1996 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि ग्रामसभा को स्वशासन का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए पेसा नियमावली का क्रियान्वयन जरूरी है। संगठन ने ग्रामसभा अध्यक्ष के सत्यापन के बिना किए जा रहे कार्यों पर रोक लगाने और पेसा कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की।
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