जनगणना में ‘सरना धर्म कोड' शामिल करें, सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
उन्होंने लिखा है कि यह अनुरोध झारखंड की जनता, विशेषकर देश के करोड़ों आदिवासियों की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को भी पत्र लिखा है।

हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिख वर्ष 2027 की जनगणना में आदिवासी/सरना धर्म कोड को पृथक धार्मिक पहचान के रूप में शामिल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा है कि यह अनुरोध झारखंड की जनता, विशेषकर देश के करोड़ों आदिवासियों की ओर से किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को भी पत्र लिखा है।
पत्र में मुख्यमंत्री ने जनगणना को राष्ट्रपति के कुशल पर्यवेक्षण में शुरू किए जाने के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए उल्लेख किया है कि प्रथम चरण में अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंधित जानकारी और द्वितीय चरण में व्यक्तिगत आंकड़ों का संकलन किया जाएगा। सरना धर्म की पृष्ठभूमि और आदिवासी समुदाय के भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए पूर्व में प्रधानमंत्री से भी अलग सरना कोड का प्रावधान रखने का अनुरोध किया गया था। ऐसे में उम्मीद है कि जनगणना के द्वितीय चरण में धर्म संबंधी जानकारी से जुड़े कॉलम में राज्य की आकांक्षा, विस का संकल्प, आदिवासी समाज की भावना के देखते हुए विचार किया जाएगा।
सीएम ने उल्लेख किया है कि किसी समाज की पहचान सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषता से होती है। आजादी से पूर्व जनगणना प्रक्रिया में विभिन्न समाज द्वारा अपनाये जा रहे धार्मिक विशिष्टताओं, उनके रीति-रिवाज तथा पहचान को अंकित किया जाता रहा है, किन्तु स्वतंत्र भारत में आदिवासी समाज के धर्म को अंकित करने की परंपरा नहीं रखी गई। सरना धर्म के विभिन्न विशिष्टताओं, अलग-अलग पूजा स्थल, कूल देवता/प्रकृति देवता एवं ग्राम देवता का प्रचलन, परंपरा और त्योहार इसे एक विशिष्ट धर्म के रूप में अलग पहचान देते हैं।
राज्य सरकार कर रही प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग
पत्र में उल्लेख किया है कि जनगणना 2027 की संपूर्ण प्रक्रिया में राज्य सरकार हर प्रकार का सहयोग कर रही है। उन्होंने स्वयं सेल्फ इन्यूमरेशन करके अभियान में छोटी भूमिका निभाई है। यह भी विचारणीय है कि किसी समाज से जुड़े आयामों व संबंधित आंकड़ों का समुचित संकलन नहीं होने पर उसका नीति-निर्धारण पर दूरगामी कुप्रभाव पड़ सकता है। वर्ष 2011 की जनगणना में, अलग कोड उपलब्ध नहीं होने के बावजूद, देश के 21 राज्यों के करीब 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में स्वयं से ‘सरना’ अंकित कराया।
हेमंत दिल्ली पहुंचे, सरना कोड की मांग करेंगे मजबूत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को दिल्ली पहुंचे, जहां वे ‘सरना धर्म कोड’ को जनगणना में शामिल करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रख सकते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की इस लंबे समय से लंबित मांग पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के मद्देनजर सीएम सोरेन इंडिया गठबंधन के नेताओं से भी मिल सकते हैं।
चांडिल-टाटा रूट में ट्रेनों की देरी पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चांडिल–टाटानगर रेल रूट में यात्री ट्रेनों की लगातार देरी को लेकर केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सीएम ने पोस्ट में लिखा कि चांडिल-टाटा रेल सेक्शन की स्थिति अस्वीकार्य हो चुकी है। 2 वर्षों से यात्री ट्रेनें लगातार घंटों लेट चल रही हैं, मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही जारी है।




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