झारखंड नाम कैसे पड़ा? मुगल काल से अब तक की कहानी; जानिए राज्य की पहचान के पीछे छुपा रहस्य
क्या आपने कभी सोचा है कि इस राज्य का नाम झारखंड क्यों पड़ा? क्या यह नाम सिर्फ जंगलों के कारण रखा गया या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य है? 'झारखंड गाथा' की दूसरी कड़ी में पढ़िए राज्य के नामकरण और पहचान के पीछे छिपे रहस्य की कहानी।

भारत के नक्शे पर मौजूद हर राज्य का नाम अपनी एक अनोखी कहानी कहता है। इनमें से एक है झारखंड, जिसे हम आज खनिजों के भंडार और घने जंगलों के लिए जानते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि इस राज्य का नाम झारखंड क्यों पड़ा? क्या यह नाम सिर्फ जंगलों के कारण रखा गया या इसके पीछे कोई गहरा रहस्य है? 'झारखंड गाथा' की दूसरी कड़ी में पढ़िए राज्य के नामकरण और पहचान के पीछे छिपे रहस्य की कहानी।
झारखंड नाम का क्या मतलब है?
सबसे पहले बात नाम की। झारखंड नाम को तोड़ें तो यह दो हिस्सों से बना है। पहला, झार और दूसरा खंड। झार या झाड़ का मतलब जंगल और झाड़-फूस से है। खंड का मतलब हिस्सा, भाग या क्षेत्र से है। यानी राज्य के नाम का सीधा और सरल सा मतलब है, जंगलों का प्रदेश। इस नाम से राज्य की कुदरती पहचान तो होती ही है, इसके अलावा इसके पीछे छिपा इतिहास और यहां रहने वाले आदिवासी समाज की झलकियां भी दिखाई देती हैं।
मध्यकाल और संस्कृत में क्या जिक्र आता है?
अब बात करते हैं राज्य के नाम से जुड़े इतिहास के बारे में। मध्यकाल और संस्कृत से जुड़े कुछ ग्रंथों में इसके नाम का जिक्र आता है। जैसे, मुगलकालीन किताब अकबरनामा में इस इलाके को छोटा नागपुर या संबंधित भुइयां को जंगलप्रदेश कहा गया है। कहीं-कहीं इसे झारखंड या झाड़खंड भी कहा गया है। लेकिन, मामला तब एकदम बदला, जब देश में गोरों ने राज करना शुरू कर दिया।
अंग्रेजों ने इस इलाके को किस नाम से पुकारा?
भारत में ब्रिटिशों की हुकूमत आई, तो उन्होंने अपनी सहूलियत से शासन करना शुरू किया, तो इस इलाके को छोटा नागपुर डिवीजन या संथाल परगना कहा। हालांकि इस समय शासन-प्रशासन में इन नामों का जिक्र हुआ, लेकिन मोटे तौर पर आम बोलचाल में इसे झारखंड के तौर पर ही जाना-पहचाना जाता रहा। देश आजाद हुआ तो रियासतों को मिलाया और अलग-अलग हिस्सों और नामों में जोड़ा-घटाया जाने लगा तो आज का झारखंड फाइनली बिहार के हिस्से आया।
फाइनली साल 2000 में रखा गया झारखंड नाम
मगर राज्य के आदिवासियों को अलग पहचान की दरकार थी। आदिवासी समाज समेत तमाम अन्य लोग इस मांग को रह-रहकर उठाते रहे कि उनकी भाषा, उनकी पहचान, उनकी संस्कृति के हिसाब से एक अलग राज्य हो। इस तरह बिहार के दक्षिणी हिस्से को अलग करके नया राज्य बनाने का कानून साल 2000 में पारित हुआ। इस तरह 15 नवंबर 2000 को नया राज्य अस्तित्व में आया। इसका नाम रखा गया, झारखंड। हालांकि वनांचल नाम भी सुझाया गया, लेकिन आखिरी सहमति झारखंड नाम पर बनी।
तो झारखंड नाम में रहस्य क्या है?
रहस्य यह है कि झारखंड नाम सिर्फ भौगोलिक स्थिति को नहीं बताता, बल्कि यह आदिवासी संघर्ष, संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक है। इसकी जड़ें हजार साल पुरानी हैं। इसमें अंग्रेजों के खिलाफ बगावत, सांस्कृतिक गर्व और स्वतंत्रता की लड़ाई की गूँज छिपी है। यही वजह है कि जब आप ‘झारखंड’ शब्द सुनते हैं, तो यह सिर्फ जंगलों की तस्वीर नहीं खींचता, बल्कि एक संघर्षमयी इतिहास और समृद्ध परंपरा को भी सामने लाता है।
कुछ बातों को गौर किया जाना जरूरी है, जैसे- लोककथाएं। झारखंड के नाम से भी कई लोककथाएं जुड़ी हैं। आदिवासी समुदाय इस भूमि को धरती आबा की धरती मानता है। “धरती आबा” का मतलब है – धरती के पिता, जो आदिवासी समाज के देवता हैं। इस तरह झारखंड सिर्फ एक भूगोल नहीं, बल्कि एक संस्कृति, परंपरा और विश्वास की पहचान है।




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