अगर पुलिस में भर्ती हो जाते, तो नेता न बनते! लालू यादव की राजनीति में एंट्री की अनसुनी कहानी
बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब वे नेता नहीं, पुलिसवाले बनना चाहते थे? पढ़िए पूरी कहानी।

क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब लालू यादव नेता नहीं, पुलिसवाले बनना चाहते थे? जी हां, एक वर्दी, बूट, अच्छा खाना और तय सैलरी- यही सपना लेकर लालू यादव पुलिस की भर्ती परीक्षा में भाग लेने गए थे। मगर किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। जब दौड़ में पीछे छूटे, तो राजनीति की राह ने उन्हें बुला लिया। समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह ने उनका हाथ थामा और लालू के सफर की राजनीतिक शुरुआत हुई।
नरेंद्र सिंह ने लालू की कराई राजनीति में एंट्री
सोशलिस्ट नेता श्रीकृष्ण सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह ही वह शख्स थे, जिन्होंने लालू यादव को राजनीति में पहला कदम रखने में मदद की थी। नरेंद्र सिंह ने लालू यादव को सोशलिस्ट पार्टी की छात्र शाखा में नियुक्त किया था। ये बात उन दिनों की है जब लालू यादव पटना पटना विश्वविद्यालय के नेशनल कॉलेज (बी.एन. कॉलेज) में पढ़ते थे।
भीड़ जुटाने, हंसाने, समझाने में माहिर लालू
लालू यादव अपने अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते थे। लालू भीड़ जुटाने, लोगों को हंसाने और अपनी बात समझाने में माहिर थे। इन्हीं गुणों के चलते नरेंद्र सिंह ने एक युवा समाजवादी के रूप में उनका नामांकन एक छात्र सभा को संबोधित करने के लिए कर दिया। नरेंद्र सिंह ने सोचा कि लालू सब संभाल लेंगे। मगर सब कुछ वैसा नहीं हुआ।
जब सभा में सब करते रहे लालू का इंतजार
छात्र सभा को संबोधित करने का समय तो आ गया, लेकिन लालू यादव का कहीं पता ठिकाना नहीं दिखा तो नरेंद्र सिंह झल्लाने लगे। सभा चलती रही और लालू यादव की कोई खैर खबर न मिली। तभी दोपहर खत्म होते-होते लालू पहुंचे तो उनका हाल-बेहाल सा मालूम हुआ। लगभग गुस्साते हुए नरेंद्र सिंह ने पूछा, तुम अब तक कहां थे?
सभा छोड़कर पुलिस परीक्षा देन पहुंचे लालू
इस पर लालू ने जो बात बताई, वो उस समय के लिहाज से हैरान करने वाली तो नहीं थी, लेकिन बाद के राजनीतिक सफर के हिसाब से बड़ी बात साबित हुई। लालू ने पहले तो टालने की कोशिश करी कि उन्हें काम आ गया था, लेकिन बाद में बात बनती नहीं दिखी तो उन्होंने कहा कि वह पुलिस भर्ती परीक्षा में भाग लेने गए थे।
लालू इसलिए पुलिस में भर्ती होना चाहते थे
लालू यादव ने शांत मन से कहा कि अगर पुलिस में नौकरी मिल जाती तो मुफ्त में यूनिफॉर्म, बूट, अच्छा खाना और साथ में वेतन भी मिलता। उन्होंने बताया कि अगर उन्हें नौकरी मिल जाती तो राजनीति वगैरह का काम नहीं करना पड़ता। मगर लालू ने बताया कि वो रेस में तेज नहीं दौड़ पाए और परीक्षा में फेल हो गए।
लालू की गरीबी और वक्त की जरूरत
संकर्षण ठाकुर अपनी किताब 'बंधु बिहारी- कहानी लालू यादव व नीतीश कुमार की' में लिखते हैं कि फुलवरिया से आया एक गरीब मिलर स्कूल का लड़का और क्या चाह सकता था! राजनीति उसके लिए जरूरी नहीं थी। यदि पुलिस की नौकरी उसे वह सब दे सकती थी, जो राजनीति उसे देने का सिर्फ वादा करती थी, तो से राजनीति की क्या जरूरत थी?




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