झारखंड में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर चला बुलडोजर, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई
घटना के बाद योगेंद्र साव की बेटी और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कह 'हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।'

झारखंड के हजारीबाग जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव के पुश्तैनी मकान पर बुलडोजर कार्रवाई करते हुए उसे ढहा दिया। यह कार्रवाई NTPC के कोयला खनन प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण वास्ते की गई। केरेडारी थाना क्षेत्र में आने वाले जोरदाग में साव के घर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया गया।
NTPC के एक अधिकारी ने कार्रवाई को लेकर कहा कि चट्टी बरियातू कोयला खनन के विस्तार कार्य में बाधा आ रही थी, जिसके चलते प्रशासन को यह कदम उठाना पड़ा। प्रशासन ने तीन जेसीबी मशीनों की मदद से यह कार्रवाई की और कोल बियरिंग एक्ट के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
लंबे समय से चल रहा था मुआवजा विवाद
मामले की जानकारी देते हुए बरकागांव के SDPO (सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी) पवन कुमार ने PTI को बताया कि यह कार्रवाई NTPC और योगेंद्र साव के बीच जमीन और मुआवजे को लेकर चल रहे लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद की गई।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि, ‘कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, और गुरुवार को घर गिराने के लिए तीन एक्सकेवेटर (खुदाई मशीनें) लगाए गए थे। इस दौरान मौके पर कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।’
1500 वर्गफीट जमीन पर कब्जा लेने के लिए कार्रवाई
उधर मौके पर तैनात मजिस्ट्रेटों में से एक हजारीबाग के जिला भूमि अधिग्रहण अधिकारी निर्भय कुमार ने कहा कि यह मामला 'कोयला धारक अधिनियम' के उल्लंघन से जुड़ा है। उन्होंने कहा, ‘NTPC ने अपने कोयला प्रोजेक्ट के लिए जमीन मालिकों को मुआवजा दे दिया था और उसे लगभग 1,500 वर्ग फीट जमीन का कब्जा लेना था। हालांकि, पूर्व मंत्री मुआवजा नहीं ले रहे थे। लेकिन CB एक्ट के अनुसार, हमें घर गिराना पड़ा और जमीन का कब्जा NTPC को सौंपना पड़ा।’
1.97 करोड़ रुपए का मुआवजा लेने के लिए नहीं थे तैयार
कार्रवाई से पहले योगेंद्र साव अपनी पत्नी के अलावा बरकागांव की पूर्व विधायक निर्मला देवी के साथ मुआवजे की रकम बढ़ाने की मांग को लेकर कई दिनों तक अपने घर पर धरने पर बैठे रहे थे। उनका आरोप था कि जमीन का उचित दाम नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि NTPC के छट्टी बरियातू कोयला खनन प्रोजेक्ट के AGM नील माधव स्वाइन ने बताया कि उक्त जमीन के लिए उन्हें लगभग 1.97 करोड़ रुपए का भुगतान मुआवजे के रूप में कर दिया गया था। जब योगेंद्र साव ने यह रकम लेने से इनकार कर दिया, तो इसे रांची के ट्रिब्यूनल कोर्ट में जमा करा दिया गया।
बेटी अंबा प्रसाद बोलीं- न्यायपालिका पर पूरा भरोसा
अधिकारी ने कहा, 'प्रशासन ने बातचीत के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया।' घटना के बाद योगेंद्र साव की बेटी और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को 'अन्यायपूर्ण' बताया। उन्होंने कह 'हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।'




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