झारखंड राज्यसभा चुनाव में पहुंची बिहार-असम समीकरण की तपिश, भाजपा की दावेदारी मजबूत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या झामुमो अपनी दोनों सीटों पर दावा ठोंकेगा या कांग्रेस को एक सीट देकर गठबंधन धर्म निभाएगा। झामुमो के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपनी ताकत के अनुरूप दोनों दांव लगाएगी।

झारखंड में होने वाले राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव में बिहार और असम के सियासी समीकरण की तपिश साफ नजर आ रही है। ऐसे में गठबंधन दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर आई दरार का फायदा भारतीय जनता पार्टी उठाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि संख्या बल के हिसाब से झारखंड विधानसभा में महागठबंधन अब भी मजबूत स्थित में नजर आ रहा है। असम विधानसभा चुनाव में झामुमो के द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद झामुमो-कांग्रेस के बीच खटपट की स्थित देखने को मिली। अब यही भाजपा के लिए सुनहरा अवसर बन सकता है।
राज्यसभा चुनाव में बन रहे चार प्रमुख समीकरण निम्म हैं...
पहला विकल्प- झामुमो के 2, कांग्रेस और भाजपा के 1-1 उम्मीदवार उसमें से झामुमो की एक सीट पक्की, दूसरी पर कड़ा मुकाबला।
दूसरा विकल्प- झामुमो, कांग्रेस और भाजपा के 1-1 उम्मीदवार, उसमें झामुमो की जीत तय; गठबंधन एकजुट रहा तो कांग्रेस, वरना भाजपा।
तीसरा विकल्प- झामुमो के 2 और भाजपा का 1 उम्मीदवार, उसमें से झामुमो की पहली सीट पक्की; एकजुटता रही तो दूसरी भी झामुमो, अन्यथा भाजपा।
चौथा विकल्प- झामुमो और भाजपा का 1-1 उम्मीदवार, उसमें से दोनों निर्विरोध चुने जाएंगे।
सीटों के गणित की बात करें झारखंड में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
महागठबंधन (कुल 56 विधायक): झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4), माले (2)। संख्या के लिहाज से दोनों सीटें आसानी से जीत सकते हैं।
एनडीए (कुल 24 विधायक): भाजपा (21), आजसू (1), जदयू (1), लोजपा (1)। भाजपा को एक सीट के लिए मात्र 4 अतिरिक्त वोट चाहिए, अन्य: JLKM (1)
झामुमो ने अबतक नहीं खोले अपने पत्ते
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या झामुमो अपनी दोनों सीटों पर दावा ठोंकेगा या कांग्रेस को एक सीट देकर गठबंधन धर्म निभाएगा। झामुमो के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपनी ताकत के अनुरूप दोनों दांव लगाएगी।
भाजपा कर रही अपनी जीत का दावा
उधर, भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया, 'चुनावी गणित हमारे पक्ष में है। पार्टी निश्चित रूप से उम्मीदवार उतारेगी।' वहीं बिहार और असम के सियासी रंग के कारण यह चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। क्या महागठबंधन टूटेगा या भाजपा को फायदा मिलेगा-यह आने वाले दिनों में साफ होगा।




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