झारखंड में उग्रवाद पर अंतिम प्रहार की तैयारी, चार जिलों को ‘विशेष कवच’, 11 करोड़ का बजट
झारखंड से लाल आतंक की जड़ें पूरी तरह उखाड़ने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। राज्य के अति उग्रवाद प्रभावित जिलों में सुरक्षा और विकास को रफ्तार देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) के तहत करोड़ों के बजट का प्रावधान किया गया है।

झारखंड से लाल आतंक की जड़ें पूरी तरह उखाड़ने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। राज्य के अति उग्रवाद प्रभावित जिलों में सुरक्षा और विकास को रफ्तार देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) के तहत करोड़ों के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार की रणनीति अब केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें इस प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने की है।
11 करोड़ का बजट
उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस बल और स्थानीय नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 111 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा गया है। इसके तहत कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए जनता और पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। साथ ही उग्रवादी घटनाओं में शहीद या घायल जवानों की समाजिक सुरक्षा के लिए अनुग्रह रशि, सूचना तंत्र को मजबूत बनाने के लिए एसपीओ व जवानों को नई चुनौतियों से तैयार करने के लिए प्रशिक्षण व बेहतर संचार तंत्र पर यह राशि खर्च की जाएगी।
प. सिंहभूम डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न, तीन जिलों पर भी नजर
वर्तमान में पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) को ‘डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न’ यानी विशेष चिंता वाले जिले के रूप में चिह्नित किया गया है। वहीं, बोकारो, चतरा और लातेहार को लीगेसी एंड थ्रस्ट जिलों की श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों में उग्रवाद के अवशेषों को खत्म करने के लिए अभियान और विकास योजनाओं का खाका तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस मद में 60 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। वहीं, उग्रवादियों से लोहा लेने के लिए राज्य पुलिस के शस्त्रागार को और मजबूत किया जाएगा। केंद्र प्रायोजित एएसयूएमपी योजना के तहत 30 करोड़ रुपये से आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और सुरक्षा उपकरण खरीदे जाएंगे। जवानों की मोबिलिटी (तेजी से आवाजाही) बढ़ाने के लिए नए वाहन और तकनीकी साजो-सामान भी जुटाए जा रहे हैं, ताकि दुर्गम इलाकों में भी त्वरित कार्रवाई की जा सके।
भारत सरकार ने 31 मार्च को माओवादी संगठन के खात्मे की डेडलाइन रखी है। लेकिन वर्तमान में भी चाईबासा के सारंडा में एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, टेक विश्वनाथ, उसकी पत्नी निलिमा समेत 45 माओवादी मौजूद हैं। सशस्त्र दस्ता अब भी छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटकर अपने अस्तित्व को बचाने में जुटा है।




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