Girls forced to swim to school, 12 villages are facing problems due to bridge collapse 1.3 करोड़ में बना पुल टूटा, तैरकर स्कूल जाने को मजबूर छात्राएं; 5 मिनट के बजाय लगते 40 मिनट, Jharkhand Hindi News - Hindustan
More

1.3 करोड़ में बना पुल टूटा, तैरकर स्कूल जाने को मजबूर छात्राएं; 5 मिनट के बजाय लगते 40 मिनट

मामला झारखंड के खूंटी जिले का है, जहां छात्र-छात्राएं हर हफ्ते दो-तीन बार नदी तैरकर स्कूल पहुंचते हैं। दरअसल बनाई नदी पर बना पुल बीती 19 जून को टूट गया था, जिसके चलते स्कूली बच्चों समेत अन्य लोगों के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है।

Mon, 14 July 2025 08:56 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, खूंटी
share
1.3 करोड़ में बना पुल टूटा, तैरकर स्कूल जाने को मजबूर छात्राएं; 5 मिनट के बजाय लगते 40 मिनट

दादी-बाबा की कहानियों में अक्सर सुनते हैं कि वो अपने बचपन में दो कोस या चार कोस पैदल चलकर या नदी में तैरकर स्कूल जाते थे। आज भारत विकसित होने के क्रम में आगे बढ़ रहा है, लेकिन नदी में मजबूरन तैरने या सड़क पर लंबी दूरी तय करने वाली सच्ची घटनाएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। मामला झारखंड के खूंटी जिले का है, जहां छात्र-छात्राएं हर हफ्ते दो-तीन बार नदी तैरकर स्कूल पहुंचते हैं। दरअसल बनाई नदी पर बना पुल बीती 19 जून को टूट गया था, जिसके चलते स्कूली बच्चों समेत अन्य लोगों के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है।

बनाई नदी पर साल 2007 में एक करोड़ तीस लाख की भारी लागत से पुल बनाया गया था, जो रांची-खूंटी सिमडेगा मार्ग को पेलेल गांव से जोड़ता था। मगर तेज बारिश और आंधी के चलते यह पुल 19 जून को ध्वस्त हो गया। इसके चलते आसपास के 12 गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 15 साल की हाईस्कूल की छात्रा, सुनीता भी उनमें से एक हैं। वह खूंटी के सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। अगले साल बोर्ड के पेपर लिखने हैं, इसके चलते उन्हें स्कूल जाना जरूरी है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:2 करोड़ के बीमा क्लेम के लिए कार में ज़िंदा जलाया इंसान! यूट्यूब देखकर रची साजिश
ये भी पढ़ें:हर साल शिक्षा पर 40 फीसदी खर्च बढ़ा, फिर भी स्कूलों में कम हो गए इतने हजार बच्चे

सुनीता ने बताया कि गांव वालों ने स्कूल जाने के लिए टूटे पुल पर चढ़ने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बना दिया था, मगर सरकार ने उसे भी हटवा दिया। दरअसल ध्वस्त हुए पुल पर चढ़ने के लिए गांव वालों ने लकड़ी की एक सीढ़ी का बंदोबस्त किया था, जिसे बाद में प्रशासन के खतरनाक बताकर हटवा दिया। अब बच्चों के पास नदी तैरकर स्कूल जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इसलिए छात्र-छात्राएं तैरकर स्कूल जाते हैं। इसके लिए वो लोग अलग से कपड़े लेकर जाते हैं और सिर पर स्कूल बैग रखकर नदी पार करते हैं, इसके बाद सूखे कपड़े पहनकर स्कूल पहुंचते हैं। इसके चक्कर में 5 मिनट लग रहा है।