झारखंड में 51 रुपए रोज पर नियुक्त हुआ था माली, अदालत में लड़ी कानूनी लड़ाई; अब आया सुप्रीम फैसला
फरवरी 2023 में अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मोतीराम 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे।

झारखंड के देवघर में 51 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर माली के रूप में काम करने वाले मोतीराम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया है। करीब 24 साल की सेवा और चार साल की कानूनी जंग के बाद 2026 में उन्हें यह राहत मिली। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया।
देवघर के बंपास टाउन निवासी मोतीराम की नियुक्ति जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी माली के रूप में हुई थी। प्रशासनिक भवन के पास लगाए गए आम के 10 पौधों की देखभाल के लिए उन्हें रखा गया था। उस समय उनकी मजदूरी 51 रुपए प्रतिदिन तय की गई थी। वर्ष 2015 में मोती राम ने मजदूरी बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें मात्र 4346 रुपए मासिक मिलते हैं। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने मार्च 2015 में उनकी मजदूरी बढ़ाकर 7593 रुपए प्रतिमाह करने का आदेश दिया।
साल 2020 में जिला प्रशासन ने 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा नियमित करने को लेकर सूचना जारी की। इसके तहत मोतीराम ने भी आवेदन दिया, लेकिन कोई निर्णय नहीं होने पर उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मार्केटिंग बोर्ड और प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि मोतीराम दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे और सेवा नियमित करने की कोई शर्त नहीं थी।
फरवरी 2023 में अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मोतीराम 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे। हाईकोर्ट की खंडपीठने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए मार्केटिंग बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए बोर्ड की याचिका खारिज कर दी और मोती राम की सेवा नियमित करने के आदेश को बरकरार रखा।




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