हवा में तेजी से हिला और फिर...; चतरा में विमान क्रैश से पहले क्या हुआ था? AAIB ने बताया
झारखंड में 23 फरवरी को हुए एयर एम्बुलेंस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो(AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम के बीच घटनाएं इतनी तेजी से बदलीं कि रांची से उड़ा विमान आखिरी बार संपर्क के महज कुछ मिनट बाद ही हादासे का शिकार हो गया।

झारखंड में 23 फरवरी को हुए एयर एम्बुलेंस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो(AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम के बीच घटनाएं इतनी तेजी से बदलीं कि रांची से उड़ा विमान आखिरी बार संपर्क के महज कुछ मिनट बाद ही हादासे का शिकार हो गया। एजेंसी ने साफ किया है कि यह रिपोर्ट अभी शुरुआती है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
क्या हुआ था
बीचक्राफ्ट किंग एयर सी90 विमान रांची से दिल्ली के लिए एक नॉन-शेड्यूल्ड एयर एम्बुलेंस उड़ान पर था। शाम करीब 7 बजकर 24 मिनट पर यह विमान चतरा जिले में क्रैश हो गया। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो पायलट, दो मेडिकल स्टाफ, एक मरीज और दो अटेंडेंट शामिल थे।
क्यों क्रैश हो गया विमान
रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे की सटीक वजह अभी तय नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह कई कारणों का नतीजा हो सकता है। उड़ान के दौरान मौसम तेजी से खराब हो रहा था, जिसके चलते पायलटों को बार-बार अपना रूट बदलना पड़ा। इसी दौरान अचानक एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया और कुछ ही मिनटों में विमान क्रैश हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज तूफान, भारी टर्बुलेंस या खराब मौसम में नियंत्रण खोने जैसी स्थिति इस हादसे के पीछे हो सकती है।
मौसम बना था वजह
मौसम की स्थिति इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। जांच में सामने आया है कि उस समय इलाके में गरज-चमक के साथ बारिश, घने क्यूम्यूलोनिंबस बादल और धुंध जैसी परिस्थितियां थीं, जिससे विज़िबिलिटी घटकर करीब 3500 मीटर रह गई थी। पायलट लगातार इन खराब हालात से बचने की कोशिश कर रहे थे, जिसके तहत उन्होंने उड़ान के तुरंत बाद ही रूट बदलने की अनुमति मांगी, फिर बाद में दिशा बदलने और ऊंचाई कम करने की भी मांग की। इससे साफ है कि क्रू अंत तक स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा था।
विमान में नहीं था ब्लैक बॉक्स
जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि विमान में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर या कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था। इसके अलावा, हादसे के बाद इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) भी एक्टिव नहीं हुआ, जिससे क्रैश साइट का पता लगाने में देरी हुई। ऐसे में तकनीकी डेटा की कमी जांच को और जटिल बना सकती है।
कब क्या हुआ
टाइमलाइन के अनुसार, विमान ने शाम 7 बजकर 7 मिनट पर रांची से उड़ान भरी और कुछ ही मिनटों बाद पायलटों ने मौसम की वजह से रूट बदलने की मांग की। 7 बजकर 9 मिनट पर विमान ने कोलकाता एटीसी से संपर्क स्थापित किया और 5000 फीट से ऊपर चढ़ने की जानकारी दी। 7 बजकर 15 मिनट पर फिर से दिशा बदलने की अनुमति ली गई और 7 बजकर 18 मिनट पर ऊंचाई कम करने की बात कही गई। 7 बजकर 19 मिनट पर एटीसी से आखिरी बातचीत हुई, जिसके बाद विमान ने कोई जवाब नहीं दिया। करीब 5 मिनट बाद, यानी 7 बजकर 24 मिनट पर यह चतरा में क्रैश हो गया।
मलबे की स्थिति भी हादसे की भयावहता को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, विमान पूरी तरह तबाह हो गया और उसके टुकड़े करीब एक किलोमीटर के दायरे में बिखरे मिले। इंजन और टेल सेक्शन का फ्यूज़लाज से अलग मिलना इस बात का संकेत है कि टक्कर बेहद तेज़ और घातक थी।
फिलहाल जांच जारी है और आईसीएओ समेत अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। जांचकर्ता मलबे, इंजन, ईंधन सैंपल और एटीसी डेटा की बारीकी से जांच कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को बड़ा कारण माना जा रहा है, लेकिन हादसे की असली वजह का खुलासा अंतिम रिपोर्ट में ही हो पाएगा।




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