बड़े अपराधी जेल जाते ही महिलाओं को थमा रहे गैंग की कमान, हथियार तस्करी से नशा-वसूली तक
पुलिस और एटीएस की जांच में सामने आया है कि कुख्यात गैंगस्टरों के जेल जाने या अंडरग्राउंड होने के बाद अब उनके आपराधिक नेटवर्क की कमान पत्नी या भरोसेमंद महिला सहयोगियों को सौंपी जा रही है।

झारखंड के अपराध जगत में बीते कुछ वर्षों में एक नया और चिंताजनक ट्रेंड तेजी से उभरकर सामने आया है। पुलिस और एटीएस की जांच में सामने आया है कि कुख्यात गैंगस्टरों के जेल जाने या अंडरग्राउंड होने के बाद अब उनके आपराधिक नेटवर्क की कमान पत्नी या भरोसेमंद महिला सहयोगियों को सौंपी जा रही है। अपराध की दुनिया में महिलाओं की भूमिका अब केवल सहायक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे सीधे गैंग के संचालन और फैसलों को नियंत्रित कर रही हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल में बंद गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने अपनी पत्नी को गिरोह की जिम्मेदारी सौंपी, जबकि राहुल दुबे जैसे अपराधियों ने महिला सहयोगियों को आगे कर दिया। ये महिलाएं रंगदारी वसूली, ठेकेदारों और कारोबारियों की रेकी, हथियारों की सप्लाई और पैसों के लेन-देन का पूरा नेटवर्क संभाल रही थीं। इस संगठित व्यवस्था के जरिए जेल में बैठा सरगना भी गैंग पर अपनी पकड़ बनाए रखता है।
सेफ हैंड बन रहीं महिलाएं, तीन मोर्चों पर सक्रिय
पुलिस और एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि महिलाएं गैंग के लिए तीन अहम मोर्चों पर सक्रिय हैं। पहला, मनी ट्रेल, जहां पुरुषों के खातों पर निगरानी के चलते अवैध कमाई महिलाओं के नाम पर खोले गए खातों या संपत्तियों में निवेश की जा रही है। दूसरा, हथियार और नशे की सप्लाई, जिसमें कम शक होने का फायदा उठाकर महिलाओं से ढुलाई कराई जा रही है। तीसरा, कानूनी बचाव, जहां महिलाएं सहानुभूति और कानूनी पेचीदगियों का लाभ उठाने की कोशिश करती हैं। इसका फायदा भी मिल रही है।
कुख्यात अपराधी आकाश राय की पत्नी पम्मी, अमन साव की बेहद करीबी रही है। हथियारों और पैसों की व्यवस्था से लेकर शूटरों तक रसद पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका थी। छत्तीसगढ़ में कारोबारी के घर फायरिंग मामले में भी उसका नाम सामने आया। पुलिस ने उसे सिमडेगा से गिरफ्तार किया।
सुजीत सिन्हा के जेल में रहने के दौरान पत्नी रिया सिन्हा ने गैंग की कमान संभाली। वह कोयलांचल शांति सेना के नाम से संगठन चला रही थी। युवाओं को पैसों का लालच देकर गैंग में जोड़ना, ठेकेदारों और कारोबारियों की रेकी कर जानकारी जेल में बंद पति और फरार प्रिंस खान तक पहुंचाना, रंगदारी और हथियार सिंडिकेट का संचालन इन सभी में उसकी भूमिका सामने आई।
हाल ही में रांची पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं, बीसीए शिक्षित प्रियंका को गिरोह की सेकंड-इन-कमांड और लेडी डॉन कहा जाता था। सुजीत सिन्हा के जेल जाने के बाद उसने गैंग का पूरा नेटवर्क संभाल लिया था। व्यापारियों को सीधे फोन कर रंगदारी की मांग करना और शूटरों को निर्देश देना उसकी दिनचर्या का हिस्सा था। उसे भी रांची से गिरफ्तार किया गया।
नरगिस बानो और रोजी परवीन, गैंग- प्रिंस खान
नरगिस बानों प्रिंस खान के करीबी सहयोगी सद्दाम अंसारी की पत्नी है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि नरगिस गैंग के लिए लेवी का पूरा हिसाब-किताब रखती थी। वह रंगदारी के पैसों का कलेक्शन और फिर उसे गिरोह के गुर्गों में बांटने का काम करती थी। वहीं रोजी परवीन को रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने प्रिंस के निर्देश पर रांची के एक बड़े व्यवसायी से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी।




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