दाना-पानी बंद हुआ तो बिल से बाहर आया, 4 IPS ने लिखी खूंखार नक्सली के अंत की कहानी
झारखंड में माओवादियों के सबसे बढ़े गढ़ माने जाने वाले सारंडा में बड़ी सूझ बूझ से नक्सलियों के सफाए की पटकथा लिखी गई। खूंखार नक्सली मिसिर व अनल का दस्ता जरायकेला इलाके में ही बीते एक साल से रह रहा था। इनके खात्मे की कहानी 4 IPS अफसरों ने मिलकर लिखी।

झारखंड में माओवादियों के सबसे बढ़े गढ़ माने जाने वाले सारंडा में बड़ी सूझ बूझ से नक्सलियों के सफाए की पटकथा लिखी गई। खूंखार नक्सली मिसिर व अनल का दस्ता जरायकेला इलाके में ही बीते एक साल से रह रहा था। इनके खात्मे की कहानी 4 IPS अफसरों ने मिलकर लिखी। ये अफसर हैं- झारखंड में सीआरपीएफ के सेक्टर आईजी साकेत कुमार सिंह, आईजी जगुआर अनूप बिरथरे, आईजी ऑपरेशन माइकल राज एस, चाईबासा एसपी अमित रेणू।
14 कैंप बनाकर की गई थी घेराबंदी
मिसिर व अनल का दस्ता जरायकेला इलाके में ही बीते एक साल से रह रहा था। इलाके को माओवादियों ने आईईडी से घेर रखा था, जिसकी वजह से पुलिस को अभियान में लगातार नुकसान भी उठाना पड़ता था। ऐसे में सुरक्षाबलों का नेतृत्व कर रहे अफसरों ने आसपास के गांवों की पूरी घेराबंदी की। इन गांवों के आसपास कुल 14 कैंप स्थापित किए। कैंप स्थापित किए जाने व रोजाना की मॉनिटरिंग चाईबासा पुलिस कर रही थी। इस कारण माओवादियों तक रसद की आपूर्ति बंद हो गई।
दाना-पानी बंद हुआ तो बिल से बाहर आए
रसद की कमी से जुझने के कारण नक्सलियों ने आधी आधी की संख्या में टीमें बांटी। ऐसे में अनल, अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा जैसे कुख्यात माओवादियों का दस्ता तकरीबन 12 किलोमीटर दूर मेधाहातुबुरू इलाके में आकर कैंप कर रहा था। दो दर्जन से अधिक माओवादी दस्ते की मौजूदगी की सटीक सूचना मिलने के बाद ऑपरेशन मेधाबुरू की योजना बनायी गई। इसी ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हासिल हुई।
इलाके में पल रहे थे खूंखार नक्सली
31 मार्च 2026 को देशभर में नक्सलियों के खात्मे की डेडलाइन रखी गई है। लेकिन इस डेडलाइन तक झारखंड में माओवादियों के खात्मे में सबसे बड़ी बाधा सारंडा इलाके में कैंप कर रहे एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा, केंद्रीय कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी जैसे शीर्ष नक्सली बन रहे थे। वहीं इन दोनों के साथ करीब 75 सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी बीते एक साल से सुरक्षाबलों के पास मौजूद थी।




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