1 करोड़ के इनामी अनल के खात्मे से नक्सली नेटवर्क की कमर टूटी, 2 चेहरे अभी भी बाकी
पीरटांड़ से लेकर सारंडा तक नक्सली नेटवर्क खड़ा करने वाला कमांडर खत्म हो चुका है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अनल के मारे जाने के बाद सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादियों की कमर टूट गई है।

जमशेदपुर के सारंडा जंगल में गुरुवार को मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी नक्सली अनल उर्फ पतिराम मांझी के मारे जाने के बाद झारखंड में सीपीआई माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। पीरटांड़ से लेकर सारंडा तक नक्सली नेटवर्क खड़ा करने वाला कमांडर खत्म हो चुका है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अनल के मारे जाने के बाद सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवादियों की कमर टूट गई है।
नक्सली नेटवर्क का मैनेजर था
अनल सिर्फ एक कमांडर नहीं, बल्कि नेटवर्क मैनेजर की भूमिका में था। लेवी वसूली से लेकर नए कैडर की भर्ती, दस्तों की मूवमेंट और बड़े हमलों की योजना उसी के जरिए तय होती थी। उसका संपर्क झारखंड से लेकर ओडिशा और बिहार तक फैला था। ऐसे में संगठन की सप्लाई लाइन, फंडिंग सिस्टम और कम्युनिकेशन चैनल पर सीधा असर पड़ेगा।
अब सारंडा में सीपीआई माओवादी के दो ही प्रमुख शीर्ष चेहरे बचे हैं। पहला पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और दूसरा सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल उर्फ आकाश। दोनों अपने दस्तों के साथ ट्राईजोन के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि, अनल के रहते जो समन्वय और रणनीतिक नियंत्रण था, वह कमजोर पड़ गया है। अनल सभी दस्तों को एक सूत्र में बांधकर ऑपरेशन चलाता था।
झारखंड समेत कई राज्यों में आतंक का पर्याय रहे एक करोड़ के इनामी कुख्यात नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा उर्फ तूफान के सारंडा में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पैतृक गांव झरहा में सन्नाटा पसरा हुआ है।
माओवादी संगठन को बड़ी चोट
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अनल के मारे जाने से सबसे बड़ा नुकसान माओवादी संगठन की रणनीतिक क्षमता को हुआ है। बड़े हमलों की योजना, टारगेट चुनना, विस्फोटकों की व्यवस्था और समय निर्धारण जैसे फैसले वही लेता था। उसके खत्म होने से संगठन रक्षात्मक मोड में आ गया है। अब माओवादी बड़े हमलों के बजाय बचाव और पलायन की रणनीति पर ज्यादा जोर देंगे। दूसरा बड़ा असर लेवी नेटवर्क पर पड़ेगा।
सारंडा, चाईबासा और आसपास के इलाकों में ठेकेदारों, माइंस और ट्रांसपोर्टरों से वसूली का पूरा सिस्टम अनल के भरोसेमंद कैडर के हाथ में था। उसके मारे जाने के बाद यह नेटवर्क बिखरने की आशंका है। फंडिंग कमजोर होते ही हथियार, विस्फोटक और नई भर्ती पर सीधा असर पड़ेगा। तीसरा असर कैडर मनोबल पर दिखेगा है। अनल लंबे समय से माओवादियों के बीच मजबूत नेता माना जाता था। उसके मारे जाने से निचले स्तर के कैडरों में डर और असमंजस बढ़ेगा। कई छोटे दस्ते सुरक्षित ठिकाने बदलने में जुट गए हैं।
और तेज हुआ अभियान, ऑपरेशन जारी
सुरक्षा एजेंसियां इस मौके को भुनाकर सरेंडर अभियान तेज करने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब मिसिर बेसरा और असीम मंडल पर दबाव बढ़ जाएगा। अगर सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चलाते रहे तो सारंडा और कोल्हान में माओवादियों का प्रभाव और भी तेजी से सिमट सकता है। अनल का अंत झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है। इससे सीपीआई माओवादी संगठन न केवल रणनीतिक रूप से कमजोर होगा, बल्कि उसका नेटवर्क, फंडिंग और मनोबल भी बिखरने की कगार पर पहुंच जाएगा।




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