धनबाद में 2015 से तैनात रहे DC-SP की संपत्ति जांच शुरू, कोयला तस्करी से जुड़ रहे लिंक
ईडी सूत्रों के मुताबिक, साल 2015 के बाद धनबाद में पोस्टेड रहे सभी डीसी, एसएसपी, सिटी व ग्रामीण एसपी, डीएसपी के विषय में विवरण मांगा गया है। ईडी सूत्रों के मुताबिक ही 2015 से अबतक पोस्टेड रहे सभी अधिकारी जांच के दायरे में हैं।

झारखंड और बंगाल में कोयला तस्करी के सिंडिकेट में शामिल प्रशासनिक व पुलिस अफसरों की भूमिका की जांच शुरू हो गई है। ईडी ने राज्य सरकार के कार्मिक विभाग व पुलिस मुख्यालय से इस संबंध में पत्राचार कर महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी हैं। ईडी सूत्रों के मुताबिक, साल 2015 के बाद धनबाद में पोस्टेड रहे सभी डीसी, एसएसपी, सिटी व ग्रामीण एसपी, डीएसपी के विषय में विवरण मांगा गया है। ईडी सूत्रों के मुताबिक ही 2015 से अबतक पोस्टेड रहे सभी अधिकारी जांच के दायरे में हैं।
ईडी ने कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर डीसी रैंक के अफसरों की जानकारी, उनके द्वारा सालाना दिए जाने वाले आय व अचल संपत्ति के विवरण समेत अन्य जानकारियां मांगी हैं। उसी तरह पुलिस मुख्यालय से पत्राचार कर धनबाद में पोस्टेड रहे एसएसपी, सिटी व ग्रामीण एसपी व डीएसपी रैंक के अफसरों का पैन डिटेल, आय व अचल संपत्तियों से जुड़ी सालाना जानकारी समेत अन्य विवरण मांगे गए हैं। ईडी सूत्रों के मुताबिक, धनबाद में वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के अलावे उन थानेदारों की भी पूरी सूची व डिटेल्स एसपी कार्यालय से मांगी गई है, जो कोयला खनन व इससे जुड़े रूट के थानों में पोस्टेड रहे हैं।
क्या है मामला
झारखंड व बंगाल में कोयला तस्करी के सिंडिकेट पर ईडी ने 21 नवंबर व 12 दिसंबर को दबिश दी थी। धनबाद में बड़े कोयला कारोबारी अनिल गोयल, बीसीसीएल के आटसोर्सिंग संचालक लालबाबू सिंह और उनके भाई कुंभनाथ सिंह, संजय खेमका, मनोज अग्रवाल, गणेश अग्रवाल, दीपक पोद्दार, हेमंत अग्रवाल, अरविंद सिंह समेत अन्य कारोबारियों के यहां ईडी ने छापेमारी की थी। कोयला तस्करी के अलग-अलग कांडों को जोड़कर चार ईसीआईआर दर्ज की गई थी। इन चार अलग-अलग ईसीआईआर में अनिल गोयल, लालबाबू सिंह, संजय खेमका व अमर मंडल आरोपी हैं।
लिंक: पुलिस और सरकारी अफसरों के साथ मिले चैट
21 नवंबर को ईडी ने कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान ईडी को राज्य पुलिस के अफसरों व सरकारी पदाधिकारियों के साथ कोयला तस्करी के लिंक मिले थे। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, कई डिजिटल साक्ष्य मिले थे, जिसमें बड़े पैमाने पर रोजाना हो रही कोयला तस्करी के साक्ष्य उपलब्ध हैं। आने वाले दिनों में चैट से बड़ा खुलासा हो सकता है। ईडी अधिकारियों द्वारा कोयला कारोबार से जुड़े अनिल गोयल के सिंडिकेट की गहराई से जांच की जा रही है। अनिल गोयल के पुलिस व प्रशासनिक अफसरों से गहरे रिश्ते रहे हैं। ईडी अधिकारियों के मुताबिक, कोयला का पूरा सिंडिकेट प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के संरक्षण में ही चलाया जाता है। यही वजह है कि साल 2015 से अबतक पोस्टेड रहे तमाम अफसरों को जांच के दायरे में रखा गया है।




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