अमेरिका की होर्मुज नाकेबंदी टूट जाएगी ईरान की कमर? जानें हर रोज होगा कितना नुकसान
अमेरिका के होर्मुज की नाकेबंदी करने से ईरान को हर रोज अरबों रुपये का नुकसान होने वाला है। अमेरिका ने सोमवार से ही ऐलान कर दिया है कि ईरानी पोर्ट से आने वाले या फिर वहां जाने वाले सारे जहाजों को रोका जाएगा।

इस्लामाबाद में ईरान के साथ वार्ता फेल होने के बाद भड़के अमेरिका ने होर्मुज और ईरान के बंदरगाहों के लिए नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया है। अगर अमेरिका होर्मुज पर नाकेबंदी करता है तो ईरान को इसके लिए हर रोज करीब 41 अरब रुपये (435 मिलियन डॉलर) की कीमत चुकानी होगी। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को निर्यात में करीब 25 अरब रुपये का रोज नुकसान होगा।
नाकेबंदी से ईरान को बड़ा नुकसान
फाउंडेसन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के मिदाय मालेकी के मुताबिक ईरान रोज 15 लाख बैरेल तेल निर्यात करता है। एक बैरेल कच्चे तेल की कीमत लगभग 87 डॉलर है। 90 फीसदी आयात फारस की खाड़ी में खर्ग द्वीप के जरिए होता है। जानकारों का कहना है कि अगर ईरान किसी दूसरे रास्ते से अपना निर्यात नहीं करता है तो होर्मुज पर नाकेबंदी होने के बाद उसको बड़ा नुकसान होने वाला है।
तुरंत नहीं पड़ेगा फर्क
ईरान को तुरंत फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसका बहुत सारा तेल पहले से ही खर्ग द्वीप से निकल चुका है और समंदर में जहाजों में है। बता दें कि अमेरिका ने सोमवार से ही नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि ईरान के बंदरगाहों से आने वाले या फिर वहां जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा। अमेरिका ने ईरान की नौसेना का चेतावनी दी है कि अमेरिका के जहाजों की तरफ बढ़ने वाले उसके किसी भी नाव या पोत को नष्ट कर दिया जाएगा।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने दुनियाभर में 20 फीसदी व्यापार के समुद्री रास्ते होर्मुज को बंद कर दिया था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका की ओर से निर्धारित समय सुबह 10 बजे (पूर्वी समयानुसार) ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से पोतों की आवाजाही अवरुद्ध की गई या नहीं। समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी' ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में "बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा" शामिल है।
कोई पोर्ट सुरक्षित नहीं- ईरान
इसमें कहा गया है कि 'गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए जलडमरूमध्य से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं', लेकिन क्षेत्र में जहाजों को सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (आईआरआईबी) के मुताबिक, "फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।" ईरानी सेना ने कहा, "इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।"
इससे पहले, अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान के स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करेगा। कुछ विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा और अभी यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या अमेरिकी बलों के लिए क्या खतरे हो सकते हैं।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन