खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना, ईरान युद्ध से ट्रंप को क्या मिला
अब जब दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ है, तो सवाल खड़ा होने लगा है कि ट्रंप को हासिल क्या हुआ। हिंदी में एक मुहावरा है, 'खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना' जिसका अर्थ है कि फायदा तो कुछ नहीं हुआ, बल्कि उलटा नुकसान हो गया। ट्रंप के साथ पिछले महीनेभर में यही होता दिखाई दिया।

मिडिल ईस्ट में महीनेभर से ज्यादा समय तक चला तनाव उस समय कम हो गया, जब डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमले किए थे, जिसमें उनके सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई नेताओं और सैन्यकर्मियों से की जान चली गई थी। इसके बाद, पूरे इलाके में युद्ध छिड़ गया। अब जब पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के लिए युद्धविराम हुआ है तो सवाल खड़े होने लगा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हासिल क्या हुआ। हिंदी में एक मुहावरा है, 'खाया पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारह आना' जिसका अर्थ है कि फायदा तो कुछ नहीं हुआ, बल्कि उलटा नुकसान हो गया। ट्रंप के साथ पिछले महीनेभर में यही होता दिखाई दिया।
ईरान को लेकर गलत आकलन कर गए ट्रंप
युद्ध की शुरुआत के समय ज्यादातर लोगों का यही मानना था कि अमेरिका कुछ ही दिनों में इस जंग में जीत हासिल कर लेगा। बस चंद दिनों की बात होगी, लेकिन युद्ध एक महीने से भी ज्यादा लंबा खिंच गया और अमेरिका से आर्थिक रूप से काफी कम ताकतवर होने के बाद भी ईरान ने अमेरिकी और इजरायली सेना का डटकर सामना किया और खाड़ी देशों में व इजरायल में जवाबी हवाई हमले करके काफी नुकसान पहुंचाया। जानकारों का मानना है कि ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति उसी तरह गलत आकलन कर गए, जैसे चार साल पहले शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस ने किया था। उस समय व्लादिमीर पुतिन को भी अंदाजा नहीं था कि यूक्रेन को पश्चिमी देशों से इतनी मदद मिल जाएगी और कुछ ही दिन तक चलने वाला युद्ध, सालों तक चलता रहेगा। ऐसे ही अमेरिका भी ईरान से गच्चा खा गया।
ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों नहीं करवा पाए ट्रंप?
ईरान पर हमला करके ट्रंप अली खामेनेई की सालों से चली आ रही सत्ता का परिवर्तन करवाना चाहते थे। ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से भी रोकना उनका लक्ष्य था, लेकिन ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं करवा सके। हवाई हमले करके उन्होंने भले ही अली खामेनेई को मार दिया, लेकिन कुछ ही दिन में कमान उनके बेटे मोमतबा खामेनेई को मिल गई। मोमतबा को लेकर भी कई तरह के दावे हुए। कभी कहा गया कि वह भी हमले में बुरी तरह से घायल हो गए हैं और यही वजह है कि वह सामने नहीं आ रहे, लेकिन समय-समय पर संदेश जारी करके इन दावों को भी ईरान ने गलत साबित करने की कोशिश की। एक समय ट्रंप ने साफ कहा था कि जो भी अली खामेनेई की जगह कमान संभालता है और उसमें ट्रंप की सहमति नहीं ली जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। मोजतबा को न सिर्फ सुप्रीम लीडर बनाया गया, बल्कि अमेरिका से कई दिनों से टक्कर भी ले रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन इतना भी आसान नहीं है, क्योंकि हवाई हमले करके ऐसा हासिल नहीं किया जा सकता है। जब तक अमेरिकी सेना जमीनी कार्रवाई नहीं करती है, तब तक सिर्फ बम बरसाकर या फिर मिसाइलें छोड़कर सत्ता को नहीं बदल सकते। इसमें लोगों की जान तो ली जा सकती है, या मिलिट्री व दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन जो ट्रंप का सत्ता परिवर्तन लक्ष्य था, वह इतनी आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता। वहीं, जमीनी कार्रवाई में भी कुछ हजार सैनिकों के बल पर ईरान जैसे विशाल देश में सामना करना आसान नहीं होगा।
युद्ध ने पूरे ईरान को कर दिया एकजुट!
साल की शुरुआत में अली खामेनेई के खिलाफ तेहरान समेत तमाम शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। लाखों लोगों ने खामेनेई को हटाने की मांग की, लेकिन सुप्रीम लीडर इन सबके पीछे अमेरिका का हाथ होने का आरोप लगाते रहे। कई दिनों तक चले इस प्रदर्शन से ट्रंप को भी लगने लगा कि अगर वे ईरान के प्रदर्शनकारियों का साथ देते हैं तो बिना सैन्य कार्रवाई से ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है। लेकिन इसका भी कुछ खास फायदा नहीं हुआ, बल्कि यह दांव भी उलटा पड़ गया। कुछ समय बाद जब प्रदर्शन रुक गए और फिर फरवरी अंत में ट्रंप ने ईरान पर हवाई हमला करके खामेनेई को मार दिया, तो पूरा लगभग पूरा देश एकजुट हो गया। जो लोग एक समय खामेनेई का विरोध कर रहे थे, वे भी अमेरिका के हमले से नाराज हुए और एकजुट होकर इनका विरोध किया। जब ट्रंप ने पुलों और ऊर्जा संयत्रों को उड़ाने की चेतावनी दी तो भी बड़ी संख्या में लोग इन जगहों पर ह्यूमन चेन बनाकर खड़े हो गए। इस तरह जो ईरान एक समय विरोध प्रदर्शनों के जरिए दशकों पुरानी सत्ता के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा था, उसने जंग के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
फ्री होर्मुज पर टोल लगवा गए ट्रंप
ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट ‘तुरुप का इक्का’ साबित हुआ। पूरी दुनिया में इसी संकरे रास्ते से 20 फीसदी तेल भेजा जाता है, उसी को युद्ध के चंद दिनों में ही ईरान ने रोक दिया। यहां से गुजरने वाले कई जहाजों को ईरानी सेना ने हवाई हमले करके समुद्र की तलहटी में समा दिया, जिससे कई सौ जहाज पूरे इलाके में जहां-तहां लंगर डालकर रुक गए। अब जब युद्धविराम की सहमति बनी है तो ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है। वह क्रिप्टोकरेंसी में वसूली करने का प्लान बना रहा है। अगर ऐसा होता है तो युद्ध रुकने के बाद भी पहले जैसी स्थिति नहीं रहेगी और टोल लगने की वजह से कच्चे तेल की कीमत पर असर पड़ेगा। ऐसे में जो होर्मुज पहले कभी जहाजों के लिए फ्री था, उसपर अब जहाजों को टोल चुकाना पड़ सकता है।
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