US Iran talks compromise or will conflict escalate Donald Trump Iran strategy poses conundrum समझौता होगा या बढ़ेगा टकराव? ईरान पर ट्रंप की रणनीति बनी पहेली, यू-टर्न से दुनिया हैरान, International Hindi News - Hindustan
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समझौता होगा या बढ़ेगा टकराव? ईरान पर ट्रंप की रणनीति बनी पहेली, यू-टर्न से दुनिया हैरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कहेंगे, शायद खुद उन्हें भी पता नहीं रहता है। यही कारण है कि अक्सर उनके बयानों को लेकर संशय बना रहता है। अब ईरान को लेकर ही देख लीजिए... शांति समझौते को लेकर लगातार विरोधाभासी बयान दिए हैं।

Mon, 25 May 2026 02:52 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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समझौता होगा या बढ़ेगा टकराव? ईरान पर ट्रंप की रणनीति बनी पहेली, यू-टर्न से दुनिया हैरान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कहेंगे, शायद खुद उन्हें भी पता नहीं रहता है। यही कारण है कि अक्सर उनके बयानों को लेकर संशय बना रहता है। अब ईरान को लेकर ही देख लीजिए... शांति समझौते को लेकर लगातार विरोधाभासी बयान दिए हैं। एक दिन पहले उन्होंने दावा किया कि तेहरान के साथ समझौता 'काफी हद तक' तैयार है। तब लगा कि सब ठीक होने वाला है। अभी कयासों का बाजार गर्म ही था कि दूसरे दिन ही ट्रंप ने कह दिया कि कोई जल्दबाजी नहीं है और प्रतिबंध तब तक बरकरार रहेंगे, जब तक ईरान अमेरिकी शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करता।

महज 24 घंटे के अंदर ट्रंप के इन बयानों ने वैश्विक बाजारों में उछाल और गिरावट दोनों देखी गई। पहले उनके आशावादी बयान से तेल की कीमतों में कमी आईं और एशियाई शेयर बाजारों में तेजी दर्ज की गई, लेकिन बाद में सावधानी भरे बयान से बाजार फिर अस्थिर हो गए। हालांकि ट्रंप के बयानों में यह उतार-चढ़ाव नया नहीं है। उन्होंने हाल के दिनों में एक तरफ तो बातचीत को निर्णायक मोड़ पर बताया, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव की चेतावनी भी दी है। दूसरी ओर भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे 'महत्वपूर्ण लेकिन अंतिम प्रगति नहीं' बताया।

ट्रंप के बयान से बाजारों पर असर

ट्रंप के इन बयानों का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। तेल, शेयर और निवेशक भावनाएं हर बयान के साथ बदल रही हैं। वित्तीय विश्लेषक और नैतिकता विशेषज्ञ अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रंप के भू-राजनीतिक बयान बाजार की अस्थिरता को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि अंदरूनी लेन-देन या किसी अवैध गतिविधि का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन हितों के टकराव और राजनीतिक बयानों व बाजार गतिविधियों के बीच संभावित संबंध को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, समर्थक इसे रणनीतिक दबाव की कला मानते हैं, जबकि आलोचक कहते हैं कि इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उत्तर कोरिया के साथ पहले कार्यकाल वाली कूटनीति की तरह, ईरान मामले में भी ट्रंप धमकी, आशावाद और अनिश्चितता का मिश्रण इस्तेमाल कर रहे हैं।

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बता दें कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार, परमाणु कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। फिलहाल समझौते की संभावना अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन ट्रंप के हर बयान से बाजारों में हलचल जरूर मच रही है। वैश्विक निवेशक अब ट्रंप के अगले बयान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव की अनिश्चितता बरकरार है।

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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि तेहरान ने समृद्ध यूरेनियम भंडार सौंपने पर सहमति नहीं दी है। फार्स न्यूज एजेंसी ने ट्रंप के बयान को 'वास्तविकता से मेल नहीं खाता' करार दिया। दरअसल, अमेरिका ने दावा किया था ईरान समृद्ध यूरेनियम सौंपने को तैयार है। इन दावों के बाद ईरान ने कहा कि ऐसी कोई सहमति नहीं बनी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की चर्चा शामिल है।

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