Iran envoy claims US-Israel strike on nuclear facility, global watchdog says have no indication हमारे परमाणु ठिकानों पर US-इजरायल ने किया हमला, ईरान का दावा; IAEA ने क्या बताया, International Hindi News - Hindustan
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हमारे परमाणु ठिकानों पर US-इजरायल ने किया हमला, ईरान का दावा; IAEA ने क्या बताया

ईरान के राजदूत ने IAEA में दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, ग्लोबल वॉचडॉग ने इस पर कहा है कि ऐसे हमले के कोई संकेत नहीं मिले हैं।

Mon, 2 March 2026 03:42 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, जेनेवा
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हमारे परमाणु ठिकानों पर US-इजरायल ने किया हमला, ईरान का दावा; IAEA ने क्या बताया

ईरान के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में बड़ा दावा किया है। ईरानी दूत ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने रविवार को उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, UN न्यूक्लियर वॉचडॉग के हेड ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि बताए गए हमलों में किसी न्यूक्लियर साइट को नुकसान हुआ है।

IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को एजेंसी के 35 सदस्यों वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को बताया कि एजेंसी के पास “इस बात का कोई संकेत नहीं है कि किसी भी न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन को नुकसान पहुँचा है या उस पर हमला हुआ है।” दरअसल, ईरानी राजदूत से पूछा गया था कि ईरान में किस परमाणु ठिकाने पर हमला हुआ है तो उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने नतान्ज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले किए हैं।

'रेडियोधर्मिता रिसाव ' की संभावना

हालांकि, आईएईए के महानिदेशक ने यह भी कहा है कि 'रेडियोधर्मिता रिसाव ' की संभावना को टाला नहीं जा सकता। राफेल ग्रोसी ने ईरान और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह के सशस्त्र हमले से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आईएईए स्थिति की निगरानी जारी रखेगा और यदि परमाणु सुरक्षा में कोई उल्लंघन होता है तो सदस्य देशों को तत्काल तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगाह किया कि यदि रेडियोधर्मिता रिसाव होता है तो बड़े शहरों को खाली कराने की नौबत आ सकती है।

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टीम स्थिति का आकलन कर रही

ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र के अनुरूप संभावित रेडियोधर्मिता रिसाव आपात स्थिति की आशंका को ध्यान में रखते हुए तत्काल कार्रवाई की है। आईएईए का 'इंसिडेंट एंड इमरजेंसी सेंटर' (आईईसी) सक्रिय है और एक समर्पित टीम स्थिति का आकलन कर रही है, हालांकि संघर्ष के कारण संचार में बाधाएं आ रही हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सुरक्षा निगरानी नेटवर्क को सतर्क कर दिया गया है और अब तक ईरान से सटे देशों में पृष्ठभूमि स्तर से अधिक विकिरण दर्ज नहीं हुआ है।

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परमाणु सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ा

ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों की स्थिति पर उन्होंने कहा कि अब तक बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तेहरान अनुसंधान रिएक्टर या अन्य परमाणु ईंधन चक्र सुविधाओं के क्षतिग्रस्त होने का कोई संकेत नहीं मिला है। आईएईए ने ईरान के परमाणु नियामक प्राधिकरण से संपर्क साधने के प्रयास जारी रखे हैं, लेकिन अभी तक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। महानिदेशक ने चेतावनी दी कि क्षेत्र के कई देशों में संचालित परमाणु ऊर्जा संयंत्र और अनुसंधान रिएक्टर हैं, जिससे किसी भी सैन्य हमले की स्थिति में परमाणु सुरक्षा के लिए जोखिम बढ़ जाता है। संयुक्त अरब अमीरात में चार परिचालित परमाणु रिएक्टर हैं, जबकि जॉर्डन और सीरिया में अनुसंधान रिएक्टर संचालित हैं।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासम्मेलन के पूर्व प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु सुविधाओं पर सशस्त्र हमले कभी नहीं होने चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर रेडियोधर्मी उत्सर्जन हो सकता है, जिसके प्रभाव सीमाओं से परे तक पड़ सकते हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दीर्घकालिक समाधान के लिए उन्होंने कूटनीति और वार्ता पर लौटने की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों का हिस्सा रहा है, लेकिन यह हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए।उन्होंने कहा, "कूटनीति कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। परमाणु कूटनीति और भी कठिन है, लेकिन असंभव नहीं। हमें जल्द से जल्द वार्ता की मेज पर लौटना ही होगा।"

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