‘झूठ फैला रहा ईरान’, दुबई में अमेरिकी ठिकानों पर हमले से US का इनकार
अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंटकॉम की ओर से जारी पोस्ट में कहा गया, 'ईरानी शासन सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहा है ताकि यह छिपा सके कि उनकी सैन्य क्षमताएं पूरी तरह से कुचल दी गई हैं और क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।'

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दुबई में अमेरिकी सैनिकों के 2 छिपे हुए ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले का दावा किया। आईआरजीसी के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फागरी ने कहा कि पहले ठिकाने पर 400 से ज्यादा और दूसरे पर 100 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। इन हमलों में 500 से अधिक अमेरिकी सैनिकों और कमांडरों के हताहत होने का दावा किया गया। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें झूठ करार दिया है।
ईरानी मीडिया ने इसे अमेरिका-इजरायल हमलों का बदला बताया और कहा कि दुबई में एम्बुलेंस घंटों तक मृतकों और घायलों को ले जाती रहीं। ईरान ने इसे अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन बताया। वहीं, अमेरिकी सेंटकॉम ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि दुबई में किसी भी अमेरिकी व्यक्ति पर कोई हमला नहीं हुआ। पोस्ट में कहा गया, 'ईरानी शासन सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहा है ताकि यह छिपा सके कि उनकी सैन्य क्षमताएं पूरी तरह से कुचल दी गई हैं और क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।' सेंटकॉम ने साफ किया कि कोई अमेरिकी सैनिक दुबई में प्रभावित नहीं हुआ और ईरान अपनी हार को छिपाने के लिए प्रोपगैंडा चला रहा है।
सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस निशाने पर
ईरान ने शुक्रवार को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे थे। इस हमले में कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआत में 10 सैनिकों के घायल होने की बात कही थी, जिसमें दो की हालत गंभीर थी। अमेरिकी सैन्य बलों की और तैनाती मध्य पूर्व में हो रही है।
यूएस सेंट्रल कमांड ने शनिवार को बताया कि जापान में आधारित एक नौसेना पोत पर सवार लगभग 2,500 मरीन अब इस क्षेत्र में पहुंच गए हैं। यह पोत यूएसएस ट्रिपोली है, जो एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप है। इसके साथ 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के जवान भी हैं।
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका अपने उद्देश्यों को बिना किसी ग्राउंड ट्रूप्स के हासिल कर सकता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को कई आकस्मिक स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा और अमेरिकी बल राष्ट्रपति को अधिकतम विकल्प और अवसर देने के लिए उपलब्ध हैं। सऊदी बेस पर इस सप्ताह दो बार पहले भी हमला हो चुका था। एक हमले में 14 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे।
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