Flying Snakes Found in Thousand Years Old Caves in Cambodia People Get Shocked After Seeing them First Time पहली बार सामने आए उड़ने वाले सांप, हवा में ही तय कर लेते हैं सफर; गुफाओं को बनाते हैं घर, International Hindi News - Hindustan
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पहली बार सामने आए उड़ने वाले सांप, हवा में ही तय कर लेते हैं सफर; गुफाओं को बनाते हैं घर

कंबोडिया की हजारों साल पुरानी गुफाओं में उड़ने वाले सांप, बहुत छोटे घोंघे आदि मिले हैं। इसके अलावा, फिरोजी कलर का पिट वाइपर सांप भी पाया गया है। हवा में उड़ने वाले सांप को देखकर लोग हैरान रह गए। वह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंचने के लिए हवा में उड़कर जाते हैं।

Sun, 29 March 2026 09:21 AMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पहली बार सामने आए उड़ने वाले सांप, हवा में ही तय कर लेते हैं सफर; गुफाओं को बनाते हैं घर

Flying Snakes Found: कंबोडिया में तरह-तरह की गुफाएं हैं, जिन्हें पहली नजर में देखकर कोई भी आश्चर्यचकित रह सकता है। इन गुफाओं में अनगिनत प्रजातियां रहती हैं। कुछ तो ऐसे जीव हाल के समय में पाए गए हैं, जो दुनिया के और किसी हिस्से में नहीं रहते। कुछ समय पहले हुए एक सर्वे में बट्टमबांग के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में स्थित गुफाओं में हैरान करने वाली प्रजातियां मिली हैं। इसमें उड़ने वाले सांप, बहुत छोटे घोंघे और मिलीपीड शामिल हैं। इसके अलावा, फिरोजी कलर का पिट वाइपर सांप भी पाया गया है। हवा में उड़ने वाले सांप को देखकर लोग हैरान रह गए। यह एक ऐसी प्रजाति है, जो पेड़ों से गुजरने के लिए अपने शरीर को चपटा करती और फिर उड़ते हुए आगे बढ़ती है। वह जमीन पर बिना उतरे हुए ही आगे का रास्ता कवर कर लेते हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ये सर्वे नवंबर 2023 से जुलाई, 2025 के बीच 10 पहाड़ियों पर स्थित 64 गुफाओं में किया गया था। कुछ समय पहले इसकी रिपोर्ट पब्लिश हुई है। वाइपर और गेको की तीन प्रजातियों को औपचारिक रूप से नाम दिया जा रहा है। एक्सपर्ट्स उनकी पहचान में जुटे हुए हैं। कंबोडिया के पथरीले कार्स्ट भू-भाग में मौजूद हर पहाड़ी और गुफा एक-दूसरे से पूरी तरह अलग-थलग है। ब्रिटेन स्थित संरक्षण संस्था फ्लोरा एंड फोना के अनुसार, जिसने कंबोडिया के पर्यावरण मंत्रालय और क्षेत्र विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह सर्वेक्षण किया था, इनमें से हर एक जगह विकास की प्रक्रिया के लिए अपने आप में एक अलग द्वीप-प्रयोगशाला की तरह काम करती है। इन जगहों पर जीवन के ऐसे अनगिनत अनोखे रूप मौजूद हैं, जिन्होंने अपने विशिष्ट और सीमित परिवेश के अनुसार खुद को ढाल लिया है।

कैलिफोर्निया की ला सिएरा यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के प्रोफेसर और इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट ली ग्रिसमरने एक बयान में कहा, “इसे जैव विविधता के उनके अपने छोटे से नमूने की तरह समझिए, जहां प्रकृति बार-बार, अपने आप वही प्रयोग दोहरा रही है।” उन्होंने आगे कहा, “हम इन अलग-अलग जगहों पर जाते हैं और उन प्रजातियों के डीएनए का विश्लेषण करते हैं, और हम देखते हैं कि वह प्रयोग कैसे चला है। कुछ एक जैसी दिखती हैं, कुछ अलग दिखती हैं, और इसका विश्लेषण करके हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उनके विकास के पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं।”

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सर्वे के दौरान इस क्षेत्र में सुंडा पैंगोलिन, हरे मोर, लंबी पूंछ वाले मकाक और उत्तरी पिग-टेल्ड मकाक जैसी विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियां भी पाई गईं। उदाहरण के लिए, 2024 में फ़ील्डवर्क के दौरान शोधकर्ताओं ने धारीदार कैंपिंग पोई बेंट-टोएड गेको की एक प्रजाति की पहचान की, जिसका नाम Cyrtodactylus kampingpoiensis रखा गया, लेकिन उन्हें चार अलग-अलग आबादी मिलीं जो अलग-अलग तरीकों से विकसित हो रही थीं। ग्रिसमर ने आगे कहा, “अगर हम सचमुच इस ग्रह पर जैव विविधता को बचाना चाहते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि यहां क्या मौजूद है। हम किसी चीज को तब तक नहीं बचा सकते, जब तक हमें यह पता न हो कि वह मौजूद है।”

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