तीन घंटे में ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप ने ईरान पर हमले और खामेनेई के खात्मे को दे दी मंजूरी, इनसाइड स्टोरी
टेक्सस में लैंड करने के बाद, शाम 4:03 बजे ट्रंप ने फिर से रिपोर्टरों से कहा कि वह बातचीत से खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि उन्होंने मिलिट्री एक्शन को मंजूरी दी है या नहीं।

वैश्विक राजनीति को झकझोर देने वाली एक बड़ी सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने शनिवार (28 फरवरी) को ईरान पर व्यापक हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई। इस अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया था। अब चर्चा इस बात की हो रही है कि जब अमेरिका ईरान से परमाणु मुद्दे पर बातचीत कर रहा था तो अचानक फिर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला क्यों बोल दिया।
अचानक बदला रुख
दरअसल, हमले से एक दिन पहले 27 फरवरी को जब ट्रंप एयर फ़ोर्स वन से टेक्सास जा रहे थे, तब उन्होंने संकेत दिया था कि वह ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ताओं से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने तत्काल किसी सैन्य कार्रवाई से इनकार किया। हालांकि, उसी दिन दोपहर बाद टेक्सास जाते समय उन्होंने अचानक इस बड़े हमले को मंजूरी दे दी जिसमें ईरान के टॉप लीडरशिप यानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का खात्मा भी शामिल था।
हिचकिचाहट से हरी झंडी तक का घटनाक्रम
शुक्रवार (27 फरवरी) को दोपहर 12:25 बजे ट्रंप टेक्सास जाते समय व्हाइट हाउस से निकले और रिपोर्टरों से कहा कि वह ईरान के साथ न्यूक्लियर बातचीत की “तरक्की से खुश नहीं” हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कोई आखिरी फैसला ले लिया है, तो उन्होंने जवाब दिया, “नहीं, मैंने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।” इसके लगभग तीन घंटे बाद, दोपहर 3:38 बजे, जब एयर फ़ोर्स वन कॉर्पस क्रिस्टी की ओर बढ़ रहा था, तभी ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंजूरी दे दी।
जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सोमवार को पेंटागन ब्रीफ़िंग में कहा, “प्रेसिडेंट ने निर्देश दिया था, और मैं कोट करता हूँ, ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी को मंज़ूरी मिली... गुड लक’।” उन्होंने बताया कि इस निर्देश के बाद US फ़ोर्स ने फ़ाइनल तैयारियाँ शुरू कर दीं। एयर डिफ़ेंस बैटरी अपनी जगह पर चली गईं, पायलटों ने स्ट्राइक पैकेज की रिहर्सल की, हथियार लोड किए गए और दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप - USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फ़ोर्ड - लॉन्च पॉइंट की ओर बढ़े।
ट्रंप ने सांसदों से फीडबैक माँगा
लगभग तीन घंटे की यात्रा के दौरान, ट्रंप ने अपने साथ यात्रा कर रहे रिपब्लिकन सांसदों के एक छोटे ग्रुप से फ़ीडबैक माँगा, जिसमें टेक्सास के सीनेटर जॉन कॉर्निन और टेड क्रूज़ भी शामिल थे। एसोसिएटेड प्रेस ने ऑपरेशन से परिचित एक व्यक्ति का हवाला देते हुए बताया कि आम राय यह थी कि तेहरान बातचीत को देरी करने की तरकीब के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था। इस ऑपरेशन को मंजूरी देने के नौ मिनट बाद, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक अलग विवाद के बारे में पोस्ट किया, जिसमें पेंटागन के साथ पब्लिक में असहमति के बाद अमेरिकी सरकार को एंथ्रोपिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल रोकने का निर्देश दिया गया था।
टेक्सस में लैंड करने के बाद, शाम 4:03 बजे ट्रंप ने फिर से रिपोर्टरों से कहा कि वह बातचीत से खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि उन्होंने मिलिट्री एक्शन को मंजूरी दी है या नहीं। उन्होंने कहा, "मैं आपको बताना नहीं चाहूंगा। आपको इतिहास की सबसे बड़ी खबर मिलती, है ना?" इसके अगले दिन यानी 28 फरवरी को सुबह 1:15 बजे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू हो गया।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की शुरुआत
अमेरिकी सेना ने 28 फरवरी की तड़के “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत बहु-आयामी हमला शुरू किया। इस ऑपरेशन में जमीन, हवा, समुद्र और साइबर—चारों स्तरों पर समन्वित कार्रवाई की गई। अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, इस मिशन का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह निष्क्रिय करना था। इस हमले में हजारों सैनिक, सैकड़ों आधुनिक लड़ाकू विमान और दो प्रमुख विमानवाहक पोत—USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford—शामिल थे। खुफिया एजेंसियों और निगरानी तंत्र ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
तेहरान में तबाही
तेहरान में एक साथ कई स्थानों पर धमाके हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में खामेनेई समेत करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई, जिनमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और रक्षा मंत्री भी शामिल हैं। हमले के कुछ घंटों बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी नेता अमेरिकी खुफिया तंत्र से बच नहीं सके।
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