Pakistani Judge with Fake Degree was in High Court for Five Years Big Action पाकिस्तान में गजब का ही खेल, नकली डिग्री लेकर जज सुना रहा था फैसले; क्या हुआ ऐक्शन, International Hindi News - Hindustan
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पाकिस्तान में गजब का ही खेल, नकली डिग्री लेकर जज सुना रहा था फैसले; क्या हुआ ऐक्शन

पाकिस्तान में एक गजब का मामला सामने आया है। यहां पर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक जज नकली डिग्री के दम पर फैसले सुना रहा था। आईएचसी ने इस बारे में 116 पन्नों का फैसला सुनाया।

Wed, 25 Feb 2026 06:56 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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पाकिस्तान में गजब का ही खेल, नकली डिग्री लेकर जज सुना रहा था फैसले; क्या हुआ ऐक्शन

पाकिस्तान में एक गजब का मामला सामने आया है। यहां पर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक जज नकली डिग्री के दम पर फैसले सुना रहा था। आईएचसी ने इस बारे में 116 पन्नों का फैसला सुनाया। कोर्ट ने जस्टिस तारिक महमूद जहांगीरी को उनके पद से हटा दिया गया। कोर्ट ने साफ कहा कि तारिक की कानून की डिग्री शुरू से ही अमान्य थी। इस तरह उनकी जज के रूप में नियुक्ति भी कानूनी तौर पर गलत थी।

पूरी तरह से फर्जी
डॉन अखबार ने इस बारे में रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद हाई कोर्ट को कराची यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार से तारिक के असली रिकॉर्ड मिले। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि उनके एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स पूरी तरह से फर्जी थे। कोर्ट के मुताबिक साल 1988 में जहांगीरी ने फेक नामांकन नंबर से एग्जाम दिया था। तब वह नकल करते हुए पकड़े गए थे। इसके बाद जहांगीरी के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लिया गया था और उन्हें तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि तब उन्होंने यह सजा स्वीकार नहीं की थी और धोखाधड़ी का रास्ता पकड़ लिया। अगले साल जहांगीरी ने फिर से एग्जाम दिया और दूसरे छात्र को अलॉट किया गया एनरोलमेंट नंबर इस्तेमाल किया।

कभी एडमिशन ही नहीं लिया
सरकारी इस्लामिया लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोर्ट में जानकारी दी कि जहांगीरी ने कभी उनके संस्थान में एडमिशन ही नहीं लिया था। कोर्ट के मुताबिक जहांगीरी को अपने असली डॉक्यूमेंट्स और लिखित जवाब देने के लिए कहा गया। लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहे। जहांगीरी ने कोर्ट में फुल बेंच की मांग की। साथ ही चीफ जस्टिस को मामले से अलग करने की भी अपील की।

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इतना ही नहीं, उन्होंने सुनवाई टालने की भी कोशिश की। कोर्ट ने जहांगीरी के इन प्रयासों को केस में देर करने की रणनीति बताया। कोर्ट ने कहाकि जब याचिकाकर्ता सबूत दे चुका है तो जज को अपनी असली डिग्री साबित करनी चाहिए। उनके ऐसा न करने पर कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला सुना दिया।

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