3 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ठुकरा दिया था नेतन्याहू का प्लान, फिर ट्रंप ने क्यों लिया ईरान संग जंग का रिस्क?
दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन का 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकलते ही युद्ध होना लगभग तय हो गया था। इससे ईरान के पास अलग रास्ता चुनने की गुंजाइश कम हो गई।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सालों से ईरान युद्ध की योजना तैयार कर रहे थे। एक रिपोर्ट में इसे लेकर बड़े खुलासे हुए हैं। दावे के मुताबिक नेतन्याहू के ईरान पर हमला करने के लंबे समय से चल रहे प्रस्ताव को अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों ने खारिज कर दिया था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मंजूरी दे दी। यह दावा अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने किया है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप से पहले यह प्लान जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और जो बाइडेन के सामने भी पेश किया गया था, लेकिन तीनों ने उसे ठुकरा दिया था।
जॉन केरी ने हाल ही में 'द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट' नाम के एक टीवी शो में यह दावे किए हैं। उन्होंने एक बयान में कहा, “ओबामा ने खारिज किया, बुश ने खारिज किया, राष्ट्रपति बाइडेन ने भी खारिज किया। मैं खुद उन बातचीत का हिस्सा रहा हूं।” उन्होंने बताया कि पहले के अमेरिकी प्रशासन ने इस युद्ध को सहमति इसीलिए नहीं दी क्योंकि वे दूसरे विकल्पों की तलाश में थे।
केरी का बड़ा दावा
केरी ने यह भी कहा कि पहले 3 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने वियतनाम और इराक युद्ध के अनुभवों को देखते हुए जंग न शुरू करने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, “वियतनाम युद्ध में हमसे झूठ बोला गया था। उस युद्ध और इराक से यही सबक मिलता है कि लोगों से झूठ बोलकर उनके बच्चों को लड़ाई में भेजना सही नहीं है।”
हालांकि ट्रंप ने युद्ध का रास्ता चुना। केरी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने के बाद ही युद्ध “लगभग तय” हो गया था। केरी ने मौजूदा युद्ध की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे ईरान के साथ समझौते की संभावना कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि हालात तब बेहतर होंगे जब न तो ईरान पर बम गिरें और न ही किसी अन्य विवादित कार्रवाई हो।
ट्रंप ने शुरू कर दी जंग
गौरतलब है कि नेतन्याहू पिछले तीन दशकों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार चेतावनी देते रहे हैं। 1990 के दशक में उन्होंने कहा था कि ईरान 3 से 5 साल में परमाणु हथियार बना सकता है, जबकि बाद के सालों में उन्होंने दावा किया कि ईरान कुछ हफ्तों या महीनों में बम बना सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि ईरान ने परमाणु हथियार बनाया या हासिल किया हो।
इस बीच, ट्रंप के कार्यकाल में नेतन्याहू को समर्थन मिला। 11 फरवरी को वाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का समय सही है और अमेरिका-इजरायल मिलकर यह कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर ट्रंप ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने नेतन्याहू के इस आकलन पर सवाल उठाए कि ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान होगा। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने इसे बेहद आसान बताया था, लेकिन यह अब तक मुमकिन नहीं हो पाया है और पश्चिम एशिया में अशांति बनी हुई है।
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