Pakistan fails to arrange talks to end US Iran war reached out to China to bolster mediation efforts फेल हुए शहबाज-मुनीर, युद्ध रुकवाने के लिए अब चीन की शरण में पहुंचे; ईरान को क्यों नहीं पाकिस्तान पर भरोसा?, International Hindi News - Hindustan
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फेल हुए शहबाज-मुनीर, युद्ध रुकवाने के लिए अब चीन की शरण में पहुंचे; ईरान को क्यों नहीं पाकिस्तान पर भरोसा?

सूत्रों के मुताबिक एक छह-सूत्रीय फ्रेमवर्क पर विचार चल रहा है। इसमें ईरान की ओर से डिमांड की जा रही गारंटी भी शामिल है। इसके जरिए बातचीत फिर से शुरू कराने की कोशिश जारी है।

Thu, 23 April 2026 12:24 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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फेल हुए शहबाज-मुनीर, युद्ध रुकवाने के लिए अब चीन की शरण में पहुंचे; ईरान को क्यों नहीं पाकिस्तान पर भरोसा?

ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई जंग को सुलझाने में पाकिस्तान पूरी तरह नाकामयाब हो गया है। इस्लामाबाद में पहले चरण की बातचीत और दो हफ्ते का सीजफायर लागू होने के बाद पाकिस्तान दोनों पक्षों को दोबारा बातचीत की मेज तक नहीं ला पाया और तनाव बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को तत्काल प्रभाव से बढ़ा तो दिया है, लेकिन दोनों तरफ से धमकियों का दौर भी जारी है। दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान और अमेरिका दोनों ने एक दूसरे के जहाजों को निशाना बनाया है। इस बीच अब खबर है कि पाकिस्तान दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए चीन की शरण जा पहुंचा है।

जानकारी के मुताबिक लाख कोशिशों के बाद भी मिली नाकामी के बाद पाकिस्तान ने अब चीन को इस प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश शुरू कर दी है। न्यूज 18 ने अपनी एक रिपोर्ट में शीर्ष कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया है कि तेहरान में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भरोसे की कमी बढ़ रही है, इसलिए अब चीन एक अहम भूमिका निभा सकता है। नए सिरे से बातचीत के लिए एक छह सूत्रीय फ्रेमवर्क की बात भी सामने आई है।

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नए फ्रेमवर्क में क्या?

जानकारी के मुताबिक छह सूत्रीय फ्रेमवर्क पर विचार किया जा रहा है, जिसका मकसद ईरान की मुख्य मांगों को पूरा करना और लंबे समय के लिए ठोस गारंटी देना है, ताकि रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू हो सके। बताया गया है कि इस फ्रेमवर्क को चीन के साथ सलाह-मशविरा करके तैयार किया गया है और यह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू करने का आधार बन सकता है।

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इस छह सूत्रीय फ्रेमवर्क की बात करें तो इसमें मुख्य तौर पर उन मुद्दों को शामिल किया गया है, जो लंबे समय से विवाद की वजह बने हुए हैं। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक, ईरान को सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की बातचीत के लिए एक तय रोडमैप शामिल है। इसके अलावा इस प्रस्ताव में अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई है, जिससे यह सिर्फ सुरक्षा समझौता ना रहकर एक व्यापारिक रिश्ते की दिशा में कदम बन सके।

ईरान को पाकिस्तान पर नहीं भरोसा

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान और पाकिस्तान के बीच भरोसे का अंतर साफ नजर आ रहा है। ईरानी अधिकारी अब सिर्फ इस्लामाबाद पर निर्भर रहने के लिए तैयार नहीं हैं और उन्होंने भरोसे के लिए चीन की भागीदारी की मांग की है। हाल ही में ईरान के सरकारी मीडिया ने पाकिस्तान पर दोहरा खेल खेलने का आरोप लगाते हुए सेना प्रमुख आसिम मुनीर को निशाने पर लिया है और कहा है कि इस्लामाबाद अमेरिका की ओर झुकाव रखते हुए ईरान के साथ भी संपर्क बनाने का नाटक कर रहा है। टीवी बहस में चर्चा की गयी कि ईरान के प्रस्तावों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ईरानी विश्लेषकों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया है और अब वह अमेरिका की ओर से 15 से 16 नयी शर्तें ईरान पर थोपने की कोशिश कर रहा है, जिससे उसके रुख पर सवाल उठते हैं।

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चीन को भी फायदा

इस बातचीत में चीन की मौजूदगी को रणनीतिक तौर पर भी जरूरी माना जा रहा है। चीन के ईरान के साथ करीबी संबंध हैं और क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए चीन की मध्यस्थता पर ईरान को भरोसा होगा। दूसरी तरफ इस प्रक्रिया में चीन की दिलचस्पी सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है। सूत्रों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ में चल रहे तनाव और अमेरिका की नाकाबंदी से चीन के ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा है, इसलिए वह इस तनाव को कम करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

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