Mossad chief told Netanyahu in advance how the regime change in Iran would happen war latest update हवाई हमले से ईरान में पलट सकती है सत्ता, युद्ध से पहले मोसाद चीफ ने नेतन्याहू को क्या बताया, International Hindi News - Hindustan
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हवाई हमले से ईरान में पलट सकती है सत्ता, युद्ध से पहले मोसाद चीफ ने नेतन्याहू को क्या बताया

ईरान में जारी युद्ध को लेकर अब एक नया दावा सामने आया है। इसके मुताबिक इजरायल की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने युद्ध से पहले प्रधानमंत्री नेतन्याहू को सलाह दी थी कि अगर तेहरान पर हमला करके ईरानी सत्ता को कमजोर कर दिया जाता है, तो फिर जनता को जमीन पर उतारकर सत्ता परिवर्तन करवाया जा सकता है।

Sat, 21 March 2026 06:00 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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हवाई हमले से ईरान में पलट सकती है सत्ता, युद्ध से पहले मोसाद चीफ ने नेतन्याहू को क्या बताया

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में दोनों तरफ से लगातार हमले हो रहे हैं। अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी ईरान लड़ रहा है। अब इस युद्ध को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख ने संघर्ष से पहले नेतन्याहू से ईरान की स्थिति पर बात की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने सलाह दी थी कि अगर हमला करके ईरान की सत्ता को कमजोर कर दिया जाता है, तो फिर ईरान की सत्ता को गिराया जा सकता है।

अमेरिकी चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक मोसाद प्रमुख बरनोआ ने नेतन्याहू को ईरान के कमजोर होते राजनैतिक नेतृत्व के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान पर हवाई हमला करके केंद्रीय नेतृत्व को खत्म कर दिया जाता है और सैन्य शक्ति को कमजोर कर दिया जाता है, तो मोसाद और सीआईए मिलकर जनता को सड़कों पर उतरने के लिए उकसा सकते हैं। वह ईरानी जनता को यह भरोसा दिला सकते हैं, कि अब अमेरिका की मदद से वह ईरान की इस्लामिक सत्ता का विकल्प तलाश सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात की भी आशंका जताई थी, कि ईरान में जमीनी हालात लगातार बदल रही है। ऐसे में कुछ भी पक्का कहना संभव नहीं। इन लक्ष्यों को हासिल करने में लंबा वक्त भी लग सकता है।

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युद्ध की शुरुआत से ही ईरानी जनता को संबोधित कर रहे थे ट्रंप और नेतन्याहू

28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के पहले ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शन हुए थे। विदेशी मीडिया के मुताबिक इस आंदोलन में ईरान में कई हजार लोगों की मौत हुई थी। उस समय पर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सत्ता को इन लोगों को फांसी देने से रोकने का श्रेय लिया था। ईरान सरकार के मुताबिक इस आंदोलन में करीब 3000 लोगों की मौत हुई थी, जबकि ट्रंप ने दावा किया था कि इसमें 15,000 से ज्यादा लोग मरे हैं, जबकि सैंकड़ों को ईरान फांसी देने वाला था।

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28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान पर हमला किया, तो उन्हें उम्मीद थी कि ईरान की जनता एक बार फिर से सड़कों पर आएगी और खामेनेई के शासन को उखाड़ फेंकेगी। इस वजह से ट्रंप ने अपने पहले भाषण में ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा, "आप (ईरान की जनता) जिस मदद का दशकों से इंतजार कर रहे हैं, वह मैं लेकर आ गया हूं। कोई भी और राष्ट्रपति इसे लेकर नहीं आता, लेकिन मैं आया हूं। अब आपके हाथों में है कि आप आपने बच्चों का भविष्य कैसे देखते हैं।" ट्रंप के अलावा नेतन्याहू ने भी ईरान की जनता को सड़कों पर उतरने की अपील की।

युद्ध के तीन हफ्ते बाद अब अमेरिका और इजरायल दोनों अपने प्रमुख उद्देश्यों में से सत्ता परिवर्तन को हटा चुके हैं। नेतन्याहू ने अपने प्रमुख लक्ष्यों में परमाणु खतरे को खत्म करना, बैलिस्टिक मिसाइल के खतरों को समाप्त करना और ऐसी स्थिति बनाना, जिससे ईरान के लोग अपनी आजादी हासिल कर सकें, तक सीमित रखा है।

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