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बिचौलिया बना पाकिस्तान, हमें उस पर बिल्कुल भरोसा नहीं; इजरायली राजदूत ने साधा निशाना

अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता में इजरायल ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर कड़े सवाल उठाए हैं। जानिए लेबनान पर जारी इजरायली हमले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कैसे बढ़ रहा है तनाव। पढ़ें पूरी खबर।

Thu, 9 April 2026 08:18 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बिचौलिया बना पाकिस्तान, हमें उस पर बिल्कुल भरोसा नहीं; इजरायली राजदूत ने साधा निशाना

भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर गहरा संदेह व्यक्त किया है। उनका स्पष्ट कहना है कि इजरायल, पाकिस्तान को इस मामले में एक 'विश्वसनीय देश' के रूप में नहीं देखता है।

इजरायली राजदूत का रुख: 'पाकिस्तान एक विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं'

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा- हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में नहीं देखते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को मध्यस्थ के तौर पर चुनने का फैसला अपने कारणों से लिया होगा। इसकी तुलना करते हुए अजार ने कहा कि अमेरिका ने अतीत में हमास के साथ समझौतों के लिए कतर और तुर्की जैसे समस्याग्रस्त देशों के साथ भी काम किया है। इजरायली दूत ने जोर देकर कहा कि वे जो अंतिम परिणाम चाहते हैं, उसके लिए अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखना इजरायल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

जेडी वेंस का पाकिस्तान दौरा और इजरायल के लक्ष्य

अजार की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की गई है। एक दीर्घकालिक समझौते को सुरक्षित करने के उद्देश्य से अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान जाने वाला है। अजार ने कहा कि इजरायल को उम्मीद है कि इन वार्ताओं से दो बड़े अस्तित्व के खतरों- ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन को खत्म किया जा सकेगा।

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कूटनीति की ओर कदम

उन्होंने कहा कि इजरायल का लक्ष्य शासन को कमजोर कर ईरानी लोगों को उनके भविष्य को अपनाने का अवसर देना था, जिसे उन्होंने हासिल कर लिया है। अब सैन्य कार्रवाई कम हो रही है और इजरायल कूटनीति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरानी शासन कोई और विकल्प नहीं छोड़ता है, तो इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए हैं।

लेबनान पर हमले और ईरान की चेतावनी

इस शांति प्रक्रिया के बीच हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। ईरान ने इजरायल पर युद्धविराम को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर लगातार हमलों से यह समझौता टूट सकता है और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में फिर से तनाव भड़क सकता है। इसके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि लेबनान इस युद्धविराम के दायरे में नहीं आता है। बुधवार को इजरायल ने लेबनान पर अब तक के सबसे भारी हमले किए, जिसमें कथित तौर पर सैकड़ों लोग मारे गए। इसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस तनाव को अप्रत्याशित नहीं माना। उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि ईरानियों ने सोचा था कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, जबकि ऐसा नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी युद्धविराम बिना थोड़ी बहुत उथल-पुथल के नहीं होता है।

फिलहाल सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने और अपने मौजूदा भंडार को सौंपने के लिए सहमत हो गया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर गहराई में दबे सभी 'परमाणु कचरे' को खोदकर बाहर निकालेगा। दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। कलीबाफ ने कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करके इजरायल पहले ही युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन कर चुका है।

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