Israel and US are wreaking havoc on Iran why is Zelensky worried? Inside Story ईरान पर कहर बरपा रहे इजरायल और US, जेलेंस्की को क्यों सता रहा डर? इनसाइड स्टोरी, International Hindi News - Hindustan
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ईरान पर कहर बरपा रहे इजरायल और US, जेलेंस्की को क्यों सता रहा डर? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की जा रही कार्रवाई ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को चिंता में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि अभी तो हथियारों की कमी नहीं आई है, लेकिन अगर मिडिल ईस्ट की लड़ाई लंबी चलती है, तो फिर कुछ भी कहना मुश्किल होगा।

Mon, 2 March 2026 07:32 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान पर कहर बरपा रहे इजरायल और US, जेलेंस्की को क्यों सता रहा डर? इनसाइड स्टोरी

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ऊपर भीषण हमला बोल दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस हमले के बाद दोनों तरफ से मिसाइलों, ड्रोन्स और रॉकेट्स के जरिए हमला किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह युद्ध लंबा भी खिंच सकता है। अब इसको लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के साथ अमेरिका का युद्ध लंबा खिंचता है, तो फिर यूक्रेन के लिए एयर डिफेंस सिस्टम और हथियारों की कमी पड़ सकती है। गौरतलब है कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका ने यूक्रेन को जाने वाली प्रत्यक्ष मदद को रोक दिया था, हालांकि इसके बाद भी यूक्रेन अपने यूरोपीय साथियों की मदद से लगातार अमेरिका हथियारों को खरीद रहा है।

सोमवार को मीडिया से सोशल मीडिया के जरिए बात करते हुए जेलेंस्की ने अमेरिका और इजरायल के ईरान में लंबे खिंचते मिशन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जर्मनी समेत यूरोप के अन्य देशों से बातचीत करके आने वाली सहायता को सुचारू रूप से जारी रखने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा, "जिन शिपमेंट पर हमने भरोसा किया था, उनमें कमी नहीं आई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिकी अभियान लंबा चलता है, तो फिर इसकी आपूर्ति को लेकर निश्चित रूप से असमंजस की स्थिति पैदा हो जाएगी।

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ईरान में अमेरिकी हमले के बाद यूक्रेन के लिए स्थिति और भी ज्यादा जटिल हो गई है, क्योंकि ईरान ने पलटवार करके अबू धाबी को भी निशाना बनाया है। अबू धाबी में ही चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति वार्ता होनी थी। अभी तक इस वार्ता के बारे में कोई नया अपडेट सामने नहीं आया है। जेलेंस्की से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक वार्ता के रद्द होने की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर अबू धाबी में बातचीत नहीं हो सकती है, तो तुर्किए और स्विट्जरलैंड इसके लिए बेहतर विकल्प हैं।

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रूस ने नहीं बदला अपना इरादा: जेलेंस्की

जेलेंस्की का कहना है कि रूस का इरादा अभी भी यूक्रेनी क्षेत्र को लेकर नहीं बदला है। उन्होंने कहा कि पूर्वी डोनेत्स्क का इलाका अभी यूक्रेन के शासन के अधीन है, लेकिन अगर रूस उस पर हमला करके उसे हथिया लेता है, तो यह यूरोप के लिए बहुत बड़ी क्षति होगी। उन्होंने रूस द्वारा कब्जा किए गए यूक्रेनी क्षेत्रों को लेकर कहा कि कीव यूक्रेन की किसी भी जमीन पर मॉस्को के अवैध कब्जे को मान्यता नहीं देगा। ज़ेलेंस्की ने कहा कि रूस ने यूक्रेन में अपने लक्ष्य नहीं बदले हैं, लेकिन वार्ता के दौरान उसकी “जमीन की भूख” कुछ हद तक कम हुई है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कीव ऐसी किसी अदला-बदली पर चर्चा नहीं कर रहा है जिसमें सीमावर्ती रूस-नियंत्रित छोटे इलाकों की वापसी के बदले डोनबास में यूक्रेन-नियंत्रित शेष क्षेत्रों को छोड़ना शामिल हो।

गौरतलब है कि लगातार चार सालों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में कीव के लिए अमेरिका ही सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर, मिसाइलों और फाइटर जेट्स तक के लिए यूरोप को अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ा है। पिछले चार सालों से लगातार यूक्रेन में यह उपयोग किया जा रहा है। अब जबकि ईरान में युद्ध शुरू हो गया है, तो अमेरिका को हथियारों की जरूरत इस क्षेत्र में पड़ सकती है, ईरान द्वारा जिस तरह से लगातार क्षेत्र के सभी देशों के ऊपर हमला किया जा रहा है, इससे यह तय है कि अगर युद्ध लंबा चलता है, तो इन देशों को अतिरिक्त एयर डिफेंस की जरूरत होगी। ऐसे में अमेरिकी रक्षा उद्योग इस मांग को पूरा कर पाता है या नहीं यह देखना होगा।

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