खामेनेई को मारकर नेतन्याहू और ट्रंप ने खड़ी कर ली मुसीबत? एक्सपर्ट क्या बोले
इजरायल और अमेरिका की तरफ से किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। तेहरान ने इस हत्या का बदला कभी न भूलने वाला हमला करके लेने की बात कही है, वहीं, ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान हमला करता है, तो ऐसा बदला लिया जाएगा, जो कभी नहीं देखा गया होगा।

Iran US Israel war update: इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। गुस्साए ईरान ने मिडल-ईस्ट में मौजूद तमाम अमेरिकी ठिकानों और अमेरिकी सहयोगियों पर हमले करना शुरू कर दिया है। इस हमले की वजह से पूरा मिडल-ईस्ट लगभग बंद पड़ा हुआ है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट ठप्प हैं और लोग फंसे हुए हैं। सबसे सुरक्षित स्थान कहे जाने वाले गल्फ देश आज आशंका की स्थिति में घिरे हुए हैं। हालांकि, इसके बाद भी न तो ईरान की तरफ से और न ही इजरायल और अमेरिकी की तरफ से किसी तरह की शांति की बात सामने आई है। ईरान ने कहा कि है कि खामेनेई की मौत का ऐसा बदला लिया जाएगा,जो न तो अमेरिका ने और न ही इजरायल ने कभी सोचा होगा। वहीं अमेरिकी के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की इस धमकी का जवाब देते हुए कहा कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो ऐसी ताकत के साथ उसके ऊपर हमला किया जाएगा, जो उसने कभी सोची भी नहीं होगी।
इन तमाम हमलों और बयानबाजी के बीच अमेरिका और इजरायल के नेता लगातार ईरान की जनता से सड़कों पर उतरने और सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए कह रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप कह भी चुके हैं कि उनके इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन और तेहरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना है। लेकिन क्या खामेनेई को मारकर ऐसा करना संभव है? भारतीय प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी की इस पर अलग राय है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि खामेनेई की हत्या करके ट्रंप और नेतन्याहू ने अपने लिए एक मुसीबत खड़ी कर ली है।
विदेशी ताकतों के हाथों सर्वोच्च नेता की हत्या
प्रोफेसर चेलानी ने लिखा, "मध्य-पूर्वी संस्कृतियों (शिया और सुन्नी) दोनों में भी बदले की भावना गहराई लिए होती है। ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या करके ट्रंप और नेतन्याहू ने तेहरान की सत्ता परिवर्तन के अपने मिशन को और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण और जटिल बना लिया है। खामेनेई की हत्या ने शिया समुदाय में विस्फोटक क्षण पैदा कर दिया है। यह उनकी शहादत और प्रतिरोध की भावना से सीधा जुड़ता है, जब किसी सर्वोच्च नेता की विदेशी ताकतों द्वारा हत्या की जाती है, तो उसे तुरंत ही आशूरा की कथा (कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत) से जोड़ दिया जाता है। यह घटना एक साधारण रीजीम चेंज की न होकर, एक पवित्र बलिदान की तरह बन जाती है।"
ईरान ने की 40 दिन के शोक की घोषणा
उन्होंने आगे लिखा, "ईरानी सरकार ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा करके खामेनेई की शहादत को मजलूमियत के सिद्धांत पर रख दिया है। इस सिद्धांत में लोगों के शोक को उनके बदला लेने की भावना में बदला जाता है। शहीद का खून न्याय की मांग करता है। तेहरान सार्वजनिक दुःख को एक बाध्यकारी “खूनी कर्ज” में बदलने की कोशिश कर रहा है। अब वहां पर असहमति को सर्वोच्च नेता के हत्यारों के साथ मिलीभगत बताकर बदनाम किया जा सकता है, जो कि एक विस्फोटक समस्या बन सकती है।"
प्रोफेसर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने खामेनेई की हत्या करके यहां की समस्या को और भी ज्यादा जटिल बना दिया है। अब यहां पर नेतृत्व परिवर्तन से ज्यादा सैन्य शासन की आशंका बढ़ गई है। शासन परिवर्तन इस बात पर निर्भर करता है कि जनता की नजरों में सत्ता पर बैठे लोगों की बैधता खत्म हो जाए, लेकिन सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की हत्या करके ट्रंप ने लोगों की बदले की भावना को भड़का दिया है। नेतन्याहू के साथ मिलकर उन्होंने तेहरान को एकजुट होने का एक ऐसा मुद्दा दे दिया है, जो उनकी आंतरिक दरारों को भी भर सकता है, यह खामेनेई की सत्ता को कमजोर करने के बजाय शासन को और भी ज्यादा मजबूत कर सकता है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन