युद्ध में फंस गए हैं, अब किसी तरह यहां से भागना चाहते हैं; ट्रंप के दावों पर क्या बोला ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ईरान के खिलाफ गलत नैरेटिव बना रहे हैं। यह बात कही है ईरान की इस्फाहान यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर मोहसिन फरखानी ने। फरखानी ने कहाकि ट्रंप का दावा पूरी तरह से झूठा है और ईरान की एयर फोर्स को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ईरान के खिलाफ गलत नैरेटिव बना रहे हैं। यह बात कही है ईरान की इस्फाहान यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर मोहसिन फरखानी ने। फरखानी ने कहाकि ट्रंप का दावा पूरी तरह से झूठा है और ईरान की एयर फोर्स को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहाकि ट्रंप ने कल कहाकि ईरान का एयर फोर्स तबाह हो चुका है। लेकिन जहां तक मैं जानता हूं यह संभव नहीं कि कोई तबाह हुआ एयर फोर्स एफ-35 को मार गिराए। उन्होंने कहाकि आप जानते हैं, ट्रंप यह सारी कहानियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि कुछ नकली उपलब्धियां लेकर युद्ध से निकलना चाहते हैं।
ईरान उन्हें गलत साबित कर देगा
फरखानी ने आगे कहाकि ईरान इन झूठे नैरेटिव्स में फंसने वाला नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया को कहानियां सुना रहे हैं। वह असल में ईरान में फंस चुके हैं। अब उन्हें कोई रास्ता नहीं नजर आ रहा है। इसलिए वह इस तरह का फेक नैरेटिव बनाकर अपने लिए रास्ता तलाश रहे हैं। फरखानी ने कहाकि लेकिन हम ट्रंप की इन बातों में फंसने वाले नहीं हैं। उन्होंने आगे कहाकि हम अमेरिका के हर नैरेटिव को पूरी तरह से गलत साबित कर देंगे।
हमारे लिए यह बातचीत बेकार
ईरानी विद्धान ने कहाकि ट्रंप ने आगे बोला है कि उन्हें यकीन है कि ईरानी अधिकारियों ने परमाणु मुद्दे के बाद कोई वार्ता नहीं की है। लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। मेरा मानना है कि ईरानी अधिकारियों का अमेरिकी टीम से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं था। यह सभी संपर्क उस समय के लिए थे जब हमारे पास परमाणु मुद्दे पर बातचीत चल रही थी। लेकिन जैसा कि पूरी दुनिया ने देखा है, अमेरिकियों ने बातचीत को भरोसे लायक नहीं छोड़ा। फरखानी ने कहा, ‘अगर अभी की बात करें तो न केवल ईरानी अधिकारी, बल्कि ईरानी लोग भी, अमेरिका के साथ बातचीत को पूरी तरह बेकार मानते हैं।’
ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने शुक्रवार को पूछा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वास्तव में ईरान को फिर से पाषाण युग में डालना चाहते हैं, क्योंकि उस समय मध्य पूर्व में कोई तेल नहीं निकाला जा रहा था। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहाकि वर्तमान और पाषाण युग के बीच एक आश्चर्यजनक अंतर है। उस समय मध्य पूर्व में कोई तेल या गैस नहीं निकाली जा रही थी। क्या अमेरिकी निश्चित हैं कि वे समय को पीछे लौटाना चाहते हैं?
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