Congress is poor party, yet its leaders are very wealthy; why Rahul Gandhi said this? also mention BJP Kanshiram Jayanti कांग्रेस गरीब पार्टी, लेकिन उसके नेता बहुत अमीर; राहुल गांधी ने क्यों कहा ऐसा, BJP का भी किया जिक्र, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कांग्रेस गरीब पार्टी, लेकिन उसके नेता बहुत अमीर; राहुल गांधी ने क्यों कहा ऐसा, BJP का भी किया जिक्र

गांधी ने अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौते के संघर्ष किया। अगर वह समझौता कर लेते तो आज उन्हें इस तरह याद नहीं किया जाता।

Fri, 13 March 2026 10:46 PMPramod Praveen वार्ता, लखनऊ
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कांग्रेस गरीब पार्टी, लेकिन उसके नेता बहुत अमीर; राहुल गांधी ने क्यों कहा ऐसा, BJP का भी किया जिक्र

लोकसभा में नेता विपक्ष और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार (13 मार्च) को लखनऊ में संविधान सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को निशाने पर लिया और कहा, "कांग्रेस गरीब पार्टी है लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं, वे सब बहुत अमीर हैं।" उन्होंने कहा कि हम अमीर पार्टी होना ही नहीं चाहते क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर बन जाएगी, वह भारतीय जनता पार्टी बन जाएगी। गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का यह डिजायन महात्मा गांधी के दौर से ही है। उन्होंने कहा हमें गरीब पार्टी ही चाहिए।

लखनऊ में मान्यवर कांशीराम की जयंती पर आयोजित कांग्रेस के संविधान सम्मेलन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की कमियों और सामाजिक बदलाव की राजनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कुछ कमियां रहीं, जिसकी वजह से बहुजन आंदोलन को मजबूती मिली और कांशी राम राजनीति में सफल हो पाए। गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस में कमियां नहीं होतीं तो कांशीराम राजनीति में इतनी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाते। कांग्रेस सामाजिक बदलाव के जिस रास्ते पर चल रही थी, उसमें उसे और तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

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केवल चाहने से राजनीति में कुछ नहीं होता

वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद ने कहा कि केवल चाहने से राजनीति में कुछ नहीं होता। जब तक विचारों के लिए संघर्ष नहीं किया जाएगा, तब तक कोई बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि जो हो रहा है उसे स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ लड़ना है, तब तक बदलाव नहीं आएगा। संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों वर्षों की सभ्यता की आवाज़ है। उन्होंने कहा कि संविधान की विचारधारा सामाजिक न्याय और बराबरी की है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार संविधान की मूल भावना को नहीं मानती।

कांशीराम ने बिना समझौते के संघर्ष किया

गांधी ने अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौते के संघर्ष किया। अगर वह समझौता कर लेते तो आज उन्हें इस तरह याद नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है और उसे अमीर बनने की इच्छा भी नहीं है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव लड़ा और संघर्ष जारी रखा।

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भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा

तेल और गैस के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता हो रहा है। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का नाम लेते हुए कई आरोप लगाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि केवल "राहुल गांधी जिंदाबाद" के नारे लगाने से कुछ नहीं होगा। असली बदलाव तभी आएगा जब लोग अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लेंगे।

समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है

उन्होंने यह भी कहा कि आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत में बांट दिया गया है और लाभ सीमित वर्ग को मिल रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर जवाहरलाल नेहरु आज जीवित होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। बाद में उन्होंने एक्स पर लिखा, “अगर कांशीराम जी पं. नेहरू के दौर में होते, वो कांग्रेस पार्टी से मुख्यमंत्री होते। वक़्त आ गया है हिंदुस्तान में राजनीति को बदलने का। सबकी हिस्सेदारी की राजनीति बहुजनों के अधिकार की राजनीति भारत के संविधान की दिखाई राजनीति।”

2027 की चुनावी रणनीति

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। महागठबंधन को 43 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि एनडीए 36 सीटों पर सिमट गया था। कांग्रेस और सहयोगी दल इसी प्रदर्शन को वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दोहराने की रणनीति बना रहे हैं।

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