ईरान ने होर्मुज के रास्ते दो LPG जहाजों को भारत जाने की दी इजाजत, इंडिया को बताया था दोस्त
युद्ध की वजह से जारी एलपीजी संकट के बीच भारत को ईरान से बड़ी राहत मिली है। ईरान ने दो एलपीजी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत जाने की इजाजत दे दी है। इससे माना जा रहा है कि कुछ हद तक एलपीजी संकट दूर हो सकता है।
ईरान-अमेरिका में जारी युद्ध के बीच भारत को शुक्रवार को बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। ईरान से लगातार संपर्क और बातचीत के बाद भारत के झंडे वाले दो लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से गुजरने की इजाजत मिल गई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इस मामले में सीधी जानकारी रखने वाले चार सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। इन जहाजों को रास्ता मिलने से देश में एलपीजी संकट को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि ईरानी राजदूत ने भारत को अपना दोस्त बताया था। न्यूज एजेंसी के दो सूत्रों और लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के डेटा के अनुसार, एक कच्चे तेल का टैंकर शनिवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है। यह टैंकर एक मार्च के आसपास होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हुए सऊदी अरब का तेल लेकर आ रहा है।
इससे पहले, होर्मुज स्ट्रेट के पास फंसे भारतीय ध्वज वाले 28 जहाजों में से एक जहाज सुरक्षित रूप से रवाना हो गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर 'जग प्रकाश' होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व से रवाना हो गया है। अमेरिका व इजरायल द्वारा हमले शुरू करने और ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान इस क्षेत्र को निशाना बनाये जाने के बाद इस संकरे समुद्री मार्ग में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। सिन्हा ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले कुल 28 जहाज फंसे हुए थे, जिनमें से 24 होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में और चार पूर्व में फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि पूर्वी तट पर मौजूद चार जहाजों में से एक 'जग प्रकाश' अब रवाना हो चुका है और यह जहाज अफ्रीका के किसी गंतव्य के लिए ईंधन ले जा रहा है। जहाज ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से गैसोलीन भर रहा था और तंजानिया के तंगा की ओर जा रहा था।
बता दें कि रसोई गैस के लिए शुक्रवार को देश के विभिन्न हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई राज्यों में लोग कतारों में लगे रहे, जबकि केंद्र ने बार-बार कहा कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। कई जगहों से भोजनालयों के बंद होने और एलपीजी की जमाखोरी की भी खबरें आई हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि घरों के लिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई है और गैस सिलेंडर के लिए घबराहट में बुकिंग करने की कोई जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पांच मार्च से अब तक घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। उन्होंने कहा, ''घबराहट में सिलेंडर की बुकिंग की कोई जरूरत नहीं है, और किसी भी एलपीजी डीलर के पास स्टॉक खत्म नहीं हुआ है।''
शर्मा ने बताया कि ईरान युद्ध से पहले औसतन 55.7 लाख बुकिंग के मुकाबले इस समय एलपीजी बुकिंग बढ़कर 75.7 लाख हो गई है, जो स्पष्ट रूप से घबराहट में की जा रही बुकिंग को दर्शाता है। बिहार में 'घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं' होने के प्रशासन के दावों के बावजूद कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग बुकिंग और आपूर्ति के लिए गैस एजेंसियों के कार्यालय पहुंचे। पटना, भागलपुर, रोहतास और कटिहार समेत कई जिलों में एलपीजी वितरण एजेंसियों पर लोगों की भीड़ देखी गई। दिल्ली में रसोई गैस की किल्लत ने छोटे व्यापारियों को आर्थिक संकट में डाल दिया। पीवीआर साकेत के पास एक फास्ट-फूड स्टॉल संचालित करने वाले नरेश चावला ने कहा कि एक ही दुकान से कई श्रमिकों और उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है।
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