अमेरिकी सैनिकों का कर रहे इंतजार, जलाकर राख कर देंगे; ईरानी स्पीकर की चेतावनी
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने रविवार को चेतावनी देते हुए कहा हैकि अगर ईरान की सेनाएं जमीन पर अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही हैं, ताकि उन्हें जलाकर राख कर सकें।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच महीनेभर से मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ी हुई है। दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर कई हमले किए हैं, जिसपर तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करके पलटवार किया है। अब अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिकों को उतारने की तैयारी कर रहा है। उसने मिडिल ईस्ट में हजारों अमेरिकी सैनिकों को भेज भी दिया है। अटकलें लग रही हैं कि अमेरिकी सैनिक ईरान के लिए सबसे महत्वपूर्ण खर्ग द्वीप पर कब्जा जमाने के लिए जाएंगे। इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कालिबफ ने रविवार को चेतावनी देते हुए कहा हैकि अगर ईरान की सेनाएं जमीन पर अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रही हैं, ताकि उन्हें जलाकर राख कर सकें और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए सजा दे सकें।
उन्होंने कहा कि हमारी गोलाबारी जारी है। हमारी मिसाइलें अपनी जगह पर तैनात हैं। हमारा संकल्प और विश्वास और बढ़ गया है। ईरान के आधिकारिक मीडिया के अनुसार, उन्होंने अमेरिका को जमीनी हमले के खिलाफ चेतावनी दी, और धमकी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरानी जमीन पर उतरी, तो इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ा जवाबी हमला किया जाएगा। उन्होंने अमेरिका की 15 सूत्रीय योजना को, जिसे पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते ईरान को सौंपा था उनकी इच्छाएं बताया, और कहा कि ट्रंप प्रशासन इस योजना के ज़रिए वह हासिल करने की कोशिश कर रहा है, जिसे वह ताकत के बल पर हासिल करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा, ''जब तक अमेरिकी ईरान को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करते रहेंगे, हमारा जवाब साफ है। हम अपमान स्वीकार करने से कोसों दूर हैं।''
'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पेंटागन ईरान में हफ्तों तक चलने वाले सीमित जमीनी अभियानों की तैयारी कर रहा है। इन अभियानों में संभवतः खर्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित तटीय ठिकानों पर छापे मारना भी शामिल हो सकता है। 'द पोस्ट' ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि ये योजनाएं, जो पूर्ण-स्तरीय आक्रमण से कम हैं, विशेष अभियानों और पारंपरिक पैदल सेना के सैनिकों द्वारा की जाने वाली छापेमारी को शामिल कर सकती हैं। इससे अमेरिकी सैनिकों को ईरानी ड्रोन और मिसाइलों, जमीनी गोलाबारी और तात्कालिक विस्फोटक उपकरणों (IEDs) के खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
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