पाकिस्तान में मुस्लिम देशों की होने जा रही बैठक, ईरान-अमेरिका युद्ध रोकने का निकालेंगे रास्ता
अमेरिका ने क्षेत्र में करीब 2500 मरीन तैनात कर दिए हैं, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी युद्ध में एंट्री मार दी है। ऐसे में बाब एल मंदेब स्ट्रेट में वैश्विक शिपिंग प्रभावित हो सकती है, जहां दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार गुजरता है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए मुस्लिम देशों की पाकिस्तान में मीटिंग होने जा रही है। पाकिस्तान सरकार ने रविवार को इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के शीर्ष राजनयिकों की बैठक आयोजित करने की घोषणा की है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ क्षेत्रीय शत्रुता पर विस्तार से चर्चा की।
क्षेत्रीय शक्तियां अब कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रही हैं। पाकिस्तान इस बैठक के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। मिस्र के विदेश मंत्री ने कतर में भी इसी मुद्दे पर चर्चा की। तुर्की और पाकिस्तान ने शांति और स्थिरता के लिए आपसी तालमेल पर जोर दिया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं, जिससे युद्ध और फैलने का खतरा बढ़ गया है।
इस बीच, अमेरिका ने क्षेत्र में करीब 2500 मरीन तैनात कर दिए हैं, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी युद्ध में एंट्री मार दी है। हूती विद्रोहियों के शामिल होने से बाब एल मंदेब स्ट्रेट में वैश्विक शिपिंग प्रभावित हो सकती है, जहां दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार गुजरता है।
युद्ध नहीं रुका तो और बढ़ेगी समस्या
युद्ध के कारण तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, उर्वरक की कमी पैदा हुई है और हवाई यात्रा बाधित हो गई है। ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। अब तक इस संघर्ष में करीब 3000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। इजरायल और अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखे हुए हैं, जबकि ईरान ने इजरायल और खाड़ी अरब देशों पर जवाबी हमले किए हैं।
सऊदी अरब ने 10 ड्रोन और कुवैत ने 4 ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है। कतर के टीवी स्टेशन अल अरबी के तेहरान स्थित कार्यालय पर इजरायली मिसाइल से हमला हुआ, जिसमें भारी नुकसान पहुंचा। इजरायल ने तेहरान समेत ईरान के विभिन्न हिस्सों में नई लहर के हमले पूरे कर लिए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका सोमवार दोपहर तक ईरानी विश्वविद्यालयों पर बमबारी की निंदा नहीं करता, तो इजरायली और अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाया जाएगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली विश्वविद्यालयों को टारगेट बताया और वहां से एक किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी।
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