सबसे बड़े पुल पर हमला कर अमेरिका ने भड़काई आग, ईरान ने हिट लिस्ट में दिखाए 8 टारगेट
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार रात ईरान के सबसे बड़े पुल को तबाह करने की घोषणा की। ट्रंप ने जल्द से जल्द ईरान को समझौता करने की चेतावनी दी है।

ईरान के सबसे बड़े पुल को निशाना बनाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की आग को भड़का दिया है। इस हमले के एक दिन बाद ईरान ने अपनी हिट जारी कर दी है। इस हिटलिस्ट में ईरान ने खाड़ी देशों के आठ बड़े पुलों की एक लिस्ट जारी की है और अमेरिका को याद दिलाया है कि ये ठिकाने ईरान की रेंज में हैं।
इस 'हिट लिस्ट' को जारी करते हुए ईरान की सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा कि खाड़ी देशों और जॉर्डन के कई बड़े पुल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के निशाने हो सकते हैं। ईरान ने अनादोलू की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की इस लिस्ट में कुवैत का 'शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह सी ब्रिज', संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 'शेख जायद ब्रिज', 'अल मक्ता ब्रिज' और 'शेख खलीफा ब्रिज'; सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला ‘किंग फहद कॉजवे’ शामिल हैं। इसके साथ ही जॉर्डन के 'किंग हुसैन ब्रिज', 'दामिया ब्रिज' और 'अब्दून ब्रिज' ईरान के टारगेट हो सकते हैं।
कुवैत में तेल रिफाइनरी पर हमला
इस बीच ईरान ने शुक्रवार को कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन दाग दिया है जिससे यहां आग लगने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं। सरकारी कंपनी कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने हमले की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया और कहा कि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने में जुटे हैं। कंपनी ने बताया कि इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बता दें कि मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर युद्ध के दौरान कई बार हमला हो चुका है।
सबसे ऊंचे पुल को US ने बनाया निशाना
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार रात ईरान के सबसे बड़े पुल को तबाह करने की घोषणा की है। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए ईरान समझौता कर ले। ट्रंप ने हमले का एक वीडियो भी पोस्ट किया। हालांकि ट्रंप ने कोई और जानकारी नहीं दी लेकिन ईरानी अधिकारियों ने बताया कि हमले में कम से कम दो लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
तेहरान से लगभग 40 किलोमीटर पश्चिम में स्थित कराज शहर में स्थित पुल (बी1 पुल) को तेहरान-कराज पुल के नाम से भी जाना जाता है। ईरानी मीडिया और अधिकारियों ने इसे "पश्चिम एशिया का सबसे ऊंचा पुल" करार दिया है। यह पुल तेहरान और करज के बीच यात्रा के समय को एक घंटे से घटाकर लगभग 10 मिनट करने के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन लिंक के रूप में बनाया गया था। पुल एक ऐतिहासिक अवसंरचना परियोजना थी जो हमले के समय लगभग पूरी होने वाली थी और पुल का निर्माण कार्य जारी था।
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