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न सीजफायर होगा न बातचीत, जब तक जरूरी होगा युद्ध चलता रहेगा; ईरान की दो टूक

दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई के लिए जिम्मेदार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवागमन ठप हो गया है। कहा जा रहा है कि इस रास्ते पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। वहीं, शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों ने सुरक्षा कारणों के चलते काम बंद कर दिया है।

Mon, 16 March 2026 06:04 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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न सीजफायर होगा न बातचीत, जब तक जरूरी होगा युद्ध चलता रहेगा; ईरान की दो टूक

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के खत्म होने के आसार नहीं हैं। अब ईरान ने साफ कर दिया है कि उन्होंने न तो सीजफायर की मांग की है और न ही बातचीत की। ईरान का कहना है कि जब तक जरूरी होगा वह इस युद्ध को लड़ते रहेंगे। खास बात है कि यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब इस युद्ध के चलते भारत समेत कई देशों पर ईंधन संकट गहराता जा रहा है। ईरान ने बताया है कि कुछ मुल्कों ने उससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रास्ता देने के लिए कहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान ने सीजफायर का अनुरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि न ही ईरान ने बातचीत की मांग की है। ईरान के प्रेस टीवी ने सीबीएस के हवाले से ये बात कही है। विदेश मंत्री का कहना है कि ईरान के सशस्त्र बल तब तक इस युद्ध को लड़ना जारी रखेंगे, जब तक यह जरूरी होगी। करीब तीन सप्ताह से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध जारी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्या बोला ईरान

रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने दावा किया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से ब्लॉक नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों के चलते क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ी है, जिससे इस रास्ते से जहाज नहीं गुजर पा रहे हैं। खास बात है कि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देशों ने ईरान से उनके जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता देने की मांग की है। उन्होंने साफ किया कि ये फैसला ईरानी सैन्य बलों को लेना है।

दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल सप्लाई के लिए जिम्मेदार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आवागमन ठप हो गया है। कहा जा रहा है कि इस रास्ते पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। वहीं, शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों ने सुरक्षा कारणों के चलते काम बंद कर दिया है।

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कई देशों में फैला तीन देशों का युद्ध

इजराइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को यह कहते हुए ईरान पर हमला किया था कि वे ईरान के परमाणु व सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और ईरान के लोगों से भी अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और फारस की खाड़ी के आसपास के पड़ोसी देशों पर हमले किए।

संघर्ष के दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। उसका कहना है कि वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन हवाई अड्डों और रिहायशी इलाको में हमलों की सूचनाएं भी सामने आईं।

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