EXPLAINER: अमेरिका से लड़ाई, फिर UAE पर मिसाइल क्यों बरसाई? ईरान का प्लान कर देगा हैरान
EXPLAINER: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जबर्दस्त लड़ाई चल रही है। लेकिन हमला यूएई पर भी खूब हो रहा है। असल में यह ईरान की सोची-समझी चाल है।

EXPLAINER: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जबर्दस्त लड़ाई चल रही है। लेकिन हमला यूएई पर भी खूब हो रहा है। असल में यह ईरान की सोची-समझी चाल है। यूएई को निशाने पर लेकर ईरान, अमेरिका को जमकर नुकसान पहुंचा रहा है। युद्ध शुरू होने से अब तक ईरान ने यूएई पर 1714 ड्रोन्स, 334 बैलिस्टिक और 13 क्रूज मिसाइलें दाग चुका है। इन हमलों में वहां के होटल, रिफाइनरीज, एयरपोर्ट और कई अहम कॉमर्शियल ठिकाने नष्ट हो चुके हैं। आइ जानते हैं आखिर ईरान क्यों यूएई पर हमले कर रहा है और ऐसा करके वह अमेरिका को कितना नुकसान पहुंचा पा रहा है...
आर्थिक चोट पहुंचाना है इरादा
एक तरफ जब अमेरिका ईरान को लगातार न्यूक्लियर प्रोग्राम पर वॉर्निंग दे रहा था। ठीक इसी समय, वह यूएई के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत कर रहा था। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश का रास्ता खोला गया। इसमें अन्य देशों की तुलना में यूएई ने दिल खोलकर अमेरिका का साथ दिया। वाइट हाउस के मुताबिक अमेरिका को 2025 में विदेशी निवेश के तौर पर 5.2 ट्रिलियन डॉलर मिले। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा, यूएई का रहा, जो 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 27 फीसदी रहा। इसके अलावा कतर द्वारा 1.2 ट्रिलियन डॉलर, जापान द्वारा 1 ट्रिलियन डॉलर, सऊदी अरब द्वारा 600 अरब डॉलर, भारत द्वारा 500 अरब डॉलर, दक्षिण कोरिया द्वारा 450 अरब डॉलर, बहरीन द्वारा 17 अरब डॉलर और आयरलैंड द्वारा 6.1 अरब डॉलर का निवेश किया गया। कुल मिलाकर, ट्रंप के नए आंतरिक विदेशी निवेशों में से 62 प्रतिशत अरब देशों द्वारा घोषित किए गए थे।
यह भी एक बड़ी वजह
ईरान द्वारा यूएई को निशाना बनाने के पीछे के अमेरिका में उसका निवेश ही नहीं है। असल में पिछले कुछ वक्त में यूएई एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब के तौर पर उभरा है। पिछले दश में यहां पर एफडीआई में भारी इजाफा हुआ है। खासतौर पर दुबई सरकार द्वारा 1000 से अधिक कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज पर मालिकाना हक की अनुमति के बाद। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 2018 में 10.4 अरब डॉलर था। यह 2021 में करीब दोगुना होकर 20.7 अरब डॉलर हो गया। साल 2024 में यह 45.6 अरब डॉलर से अधिक हो गया। 2024 में, पश्चिम एशिया से कुल निवेश का 56 फीसदी अकेले संयुक्त अरब अमीरात में ही आया।

भरोसा खत्म करने की कोशिश
बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसी मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्थाओं को राजनीतिक रूप से स्थिर, निवेश-अनुकूल और सुरक्षित माना गया है। यह उन्हें वैश्विक पूंजी और पश्चिमी रणनीतिक हितों, दोनों के लिए आकर्षक बनाता है। इसमें भी विशेष तौर पर यूएई की लोकप्रियता कुछ ज्यादा ही है।
ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात पर हमला करके, ईरान एक प्रमुख अमेरिकी आर्थिक साझेदार को बिना सीधे अमेरिका को निशाना बनाए नुकसान पहुंचा रहा है। यह वॉशिंगटन को भी संकेत दे रहा है कि ईरान बदले के रूप में उसे किस तरह से प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, इन हमलों से ईरान खाड़ी देशों पर हमला करके दुनिया के तमाम देशों के भरोसे को भी डिगाने की कोशिश कर रहा है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन