सोशल मीडिया पर बैन, फिर कैसे जुटा लिए इतने लोग; नेपाल विरोध प्रदर्शन की इनसाइड स्टोरी
नेपाल में लोगों का गुस्सा उबाल पर है। कहने को तो यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर बैन के विरोध में है। लेकिन इसकी जड़ें इससे भी कहीं गहरी हैं। आइए आपको बताते हैं इस विरोध प्रदर्शन की इनसाइड स्टोरी...

नेपाल में लोगों का गुस्सा उबाल पर है। कहने को तो यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर बैन के विरोध में है। लेकिन इसकी जड़ें इससे भी कहीं गहरी हैं। इसके अलावा इस विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों की भीड़ जुटाने का तरीका भी कम चौंकाने वाला नहीं है। आंदोलन हिंसक भी हो चुका है। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। नेपाल सरकार की कैबिनेट बैठक में गृहमंत्री का इस्तीफा तक हो चुका है। आइए आपको बताते हैं इस विरोध प्रदर्शन की इनसाइड स्टोरी...
ऐसे जुटाई गई भीड़
आमतौर पर किसी बड़े विरोध प्रदर्शन में भीड़ जुटाने का सबसे पॉपुलर तरीका सोशल मीडिया है। लेकिन नेपाल में तो सोशल मीडिया पर प्रतिबंध पहले ही लग चुका था। फिर इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटी कैसे? यह सवाल कई लोगों के जेहन में तैर रहा होगा। इसका जवाब भी है सोशल मीडिया। असल में नेपाल में अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तो प्रतिबंधित किया गया, लेकिन टिकटॉक इससे बचा रहा। बताया जा रहा है कि टिकटॉक ने सरकार को आश्वासन दिया था कि वह सरकार के निर्देशों के मुताबिक काम करेगा। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने अपना संदेश पहुंचाने के लिए वीपीएन को भी हथियार बनाया।
कहां से उभरा गुस्सा
अब एक सवाल और है कि क्या यह सिर्फ सोशल मीडिया बैन से उभरा गुस्सा है। इसका जवाब है नहीं। इसके पीछे एक और ट्रेंड है, ‘नेपो किड्स’। इसके तहत नेताओं के बच्चों को लग्जरी लाइफस्टाइल वाली फोटोज ट्रेंड हो रही थीं। इसके जरिए नेपोटिज्म और भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाने की पहल गई थी। अब सोशल मीडिया पर बैन का गुस्सा भी इसमें मिल गया। इस तरह नेपोटिज्म को लेकर शुरू हुआ हैशटैग एक फुल स्केल प्रोटेस्ट में तब्दील हो गया। जेन-जी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लोगों की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है। अब विरोध प्रदर्शन में गवर्नमेंट डील्स और बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार की भी बातें हो रही हैं।
कहां से मिली प्रेरणा
इस विरोध प्रदर्शन की प्रेरणा कहां से मिली? इसके पीछे श्रीलंका और बांग्लादेश में सरकारों के खिलाफ हुए प्रदर्शन हैं। एक प्रदर्शनकारी ने अल जजीरा से यह बात कही। उसने बताया कि नेपो किड्स ट्रेंड्स फिलिपींस से आया। टिकटॉक में आए वीडियोज में नेपाली पॉलिटिशियंस के बच्चों को लग्जरी लाइफ जीते हुए दिखाया गया था।
ऐसे हुई शुरुआत
सरकार के खिलाफ असंतोष को सरकार के 4 सितंबर के फैसलों ने और भड़का दिया। इस फैसले में राष्ट्रहित में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ब्लॉक करने की बात कही गई थी। इस विरोध प्रदर्शन का औपचारिक आयोजक ‘हामी नेपाल’ नाम का एक संगठन है। यह संगठन 2015 में युवाओं के ग्रुप के रूप में शुरू हुआ था। इस संगठन के विरोध प्रदर्शन को ओली सरकार से नाराज लोगों ने भी समर्थन दिया। नेपाल की पोखरा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर योग राज लमिछाने कहते हैं कि युवाओं का गुस्सा और सरकार में उनके अविश्वास की देन है यह प्रोटेस्ट। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध ने तो इस आग में बस घी छिड़का है।
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