How Nepal protest got violent protesters tells inside story of stir against social media ban कैसे हिंसक हो गया आंदोलन, नेपाली प्रदर्शनकारियों ने बताई अंदर की बात; पुलिस पर मढ़ा दोष, International Hindi News - Hindustan
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कैसे हिंसक हो गया आंदोलन, नेपाली प्रदर्शनकारियों ने बताई अंदर की बात; पुलिस पर मढ़ा दोष

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर आंदोलन हिंसक हो चुका है। इस विरोध प्रदर्शन में अभी तक 16 लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन हिंसक होने का दोष पुलिस के सिर मढ़ दिया है।

Mon, 8 Sep 2025 07:06 PMDeepak लाइव हिन्दुस्तान, काठमांडू
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कैसे हिंसक हो गया आंदोलन, नेपाली प्रदर्शनकारियों ने बताई अंदर की बात; पुलिस पर मढ़ा दोष

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर आंदोलन हिंसक हो चुका है। इस विरोध प्रदर्शन में अभी तक 16 लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन हिंसक होने का दोष पुलिस के सिर मढ़ दिया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना बना रहे थे। लेकिन पुलिस की तरफ से हिंसा की शुरुआत हुई और फिर यह आगे बढ़ती ही चली गई। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उसके दोस्त के सिर में गोली मारी गई।

आंदोलनकारियों ने बताया कि हम शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ रहे थे। तभी हमने देखा कि पुलिस ने हमारे आंदोलन को हिंसा की आग में झोंक दिया है। पुलिस लोगों पर गोलियां चला रही थी। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बिल्कुल खिलाफ था। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग हमारे ऊपर इस तरह से बल प्रयोग नहीं कर सकते। गौरतलब है कि काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स फांद दिए। उन्होंने पोस्टर्स फाड़ डाले और संसद भवन की इमारत को घेर लिया। यह प्रदर्शन देश में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में बुलाया गया है।

हालात नियंत्रण से बाहर जाते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इसमें 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। नेपाल पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि दो सुरक्षाकर्मियों समेत 42 लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज वर्तमान में काठमांडू के सिविल अस्पताल में चल रहा है। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है। हिंसा के बाद स्थानीय प्रशासन ने राजधानी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लगा दिया। यह विरोध प्रदर्शन दूसरे शहरों में भी फैल गया है।

काठमांडू जिला प्रशासन ने संसद भवन के आसपास के क्षेत्रों में अशांति को रोकने के लिए अपराह्न 12:30 बजे से रात 10:00 बजे तक निषेधाज्ञा लागू की। मुख्य जिला अधिकारी छबि लाल रिजाल ने एक नोटिस में कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में लोगों के आवागमन, प्रदर्शन, बैठक, सभा या धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। स्थानीय प्रशासन ने बाद में ये प्रतिबंधात्मक आदेश राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में भी लागू कर दिए।

नेपाल सरकार ने अनिवार्य पंजीकरण प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर चार सितंबर को फेसबुक, व्हाट्सऐप और एक्स सहित 26 सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध उन्हें विनियमित करने के लिए लगाया गया है, लेकिन आम जनता में धारणा यह है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला होगा और सेंसरशिप की नौबत आ सकती है।

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