Indian Fishermen in Crisis Due to Iran War Boats Grounded on Coasts Major Impact on the Economy ईरान युद्ध की वजह से संकट में भारतीय मछुआरे, तटों पर ठहर गईं नौकाएं; अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर, International Hindi News - Hindustan
More

ईरान युद्ध की वजह से संकट में भारतीय मछुआरे, तटों पर ठहर गईं नौकाएं; अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर

ईरान युद्ध की वजह से फिशरीज सेक्टर पर बहुत बुरा असर पड़ा है। गोवा और महाराष्ट्र के मछुआरों की बहुत सारी नौकाएं तटों पर ही खड़ी हैं। यहां के लोगों का कहना है कि अगर 10 दिन और समस्या बनी रही तो उन्हें भी अपना काम बंद करना पड़ेगा। 

Sun, 5 April 2026 06:38 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
share
ईरान युद्ध की वजह से संकट में भारतीय मछुआरे, तटों पर ठहर गईं नौकाएं; अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर

ईरान में चल रहे युद्ध का असर दुनिया के हर एक देश पर देखा जा रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पहले के मुकाबले एलपीजी सप्लाई में कमी आई है। वहीं डीजल और पेट्रोल को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। गोवा और महाराष्ट्र के मछुआरे इस परिस्थिति के शिकार हुए हैं। उनकी सैकड़ों नौकाएं समंदर किनारे खड़ी रहने को मजबूर हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कई मछुआरों का कहना है कि एलपीजी सिलिंडर की कमी की वजह से उनके सामने बोट पर खाना बनाने की भी समस्या है। हालांकि कई लोग अब स्टोव पर भरोसा कर रहे हैं।

एलपीजी सिलिंडर की कमी

एक मछुआरे ने कहा, आज एक सिलिंडर की कीमत ब्लैक मार्केट में 10 हजार के करीब है। ऐसे में हमें स्टोव का सहारा लेना पड़ रहा है। बतादें कि ईरान यु्द्ध को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। ऐसे में कई देशों में ऊर्जा संकट गहराता ही जा रहा है। मुंबई और गोवा में बल्क फ्यूल की कीमत भी बढ़ गई है। मुंबई में रहने वाले कोली समुदाय के लोगों का कहना हैकि उनकी नाव 15 दिन में करीब 2000 से 3000 लीटर डीजल खाती है। ऐसे में उन्हें बल्क डीजल लेना पड़ता है जिसकी कीमत बढ़ गई है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बिहार में यूनिसेफ, यूएनडीपी और डब्ल्यूएचओ ने कामकाज किया बंद, टीकाकरण पर असर

बल्क डीजल की कीमतों में वृद्धि

उन्होंने कहा,मुंबई में बल्क डीजल 122 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है जो कि पहले 70 से 80 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहा था। ओएमसी ने एक बार फिर बल्क डीजल की कीमत 23 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी। बता दें कि तेल की कीमतें भारत पेट्रोलिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी ओएमसी ही तय करती हैं। महाराष्ट्र सरकार मछुआरों को बल्क डीजल पर सब्सिडी भी उपलब्ध करवाती है।

मालिम के एक मछुआरे ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर की कमी होते ही बहुत सारे मछुआरों ने फिशिंग का समय कम करदिया। उन्होंने कहा कि अगदर कोई चार दिन के लिए फिशिंग पर जाताहै तो नाव में कम से कम 4 से 5 लोग होते हैं और उन्हें एक एलपीजी सिलिंडर की जरूरत होती है. वहीं बड़ी नावों पर 30 से 40 लोग होते हैं और वे 15 दिन के लिए निकलते हैं। ऐसे में उन्हें 3 से 4 सिलिंडर की जरूरत होती है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक गोवा में करीब 12651 मछुआरे परिवार हैं। फिशरी सेक्टर तटीय राज्यों की जीडीपी में करीब 2.5 फीसदी का योगदान देते हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:होर्मुज से निकलने के लिए इस देश को मिली खुली छूट, ईरान बोला- हमारे भाई...
ये भी पढ़ें:भारत से मिले चंदे से खरीदीं 40 टन दवाएं फंसी, ईरान अब तक क्यों नहीं पहुंचा?

अर्थव्यवस्था में फिशरीज सेक्टर का बड़ा योगदान

डायरेक्टरेट ऑफ प्लानिंग स्टेटिस्टिक्स ऐंड इवैलुएशन के मुताबिक 2024-25 में गोवा के समंदर से 1.27 लाख टन मछलियां पकड़ी गईं जिनकी कीमत करीब 2300 करोड़ थी। ज्यादातर मछली का निर्यमात दक्षिण-पुर्वी एशिया, अमेरिका, चीन और यूरोप को किया गया। वहीं महाराष्ट्र में 2026 में फिशिंग कम्युनिी के करीब 3.65 लोगों को इससे रोजगार मिलता है। इनमें से 23000 से ज्यादा मुंबई के ही रहने वाले हैं। इस उद्योग का साल का टर्नओवर करीब 9121 करोड़ रुपये है।

मछुआरों का कहना है कि तट के पास डीजल 138 रुपये प्रति लीटर तक बेचा जा रहा है। अगर ऐसे ही 10 दिन और चलता रहा तो स्थिति यह होगी की काम बंद ही करना पड़ेगा। बता दें कि अगर मछुआरों का काम ज्यादा प्रभावित होता है तो इसका असर महाराष्ट्र और गोवा दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।