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संकट की घड़ी में भारत फिर बना बांग्लादेश का तारणहार, भेजा 5000 टन अतिरिक्त डीजल

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बांग्लादेश में गहराए ईंधन संकट के बीच भारत ने 5000 टन अतिरिक्त डीजल भेजकर बड़ी मदद की है। जानिए 'भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन' के जरिए कैसे हो रही है यह सप्लाई और क्या है आगे का प्लान।

Sat, 28 March 2026 07:37 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, ढाका
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संकट की घड़ी में भारत फिर बना बांग्लादेश का तारणहार, भेजा 5000 टन अतिरिक्त डीजल

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल का भारी संकट मंडरा रहा है। इस बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद करते हुए 5,000 टन अतिरिक्त डीजल की सप्लाई की है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार रात इस बात की पुष्टि की। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) मो. मुर्शेद हुसैन आजाद ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत से 5,000 टन अतिरिक्त डीजल बांग्लादेश पहुंच गया है।

इस नई खेप के साथ, बांग्लादेश को हाल के दिनों में भारत से कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है। 28 मार्च को 6,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजने के लिए पंपिंग की प्रक्रिया की जाएगी। भारत ने आगामी अप्रैल माह में 40,000 टन डीजल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है।

कैसे पहुंच रहा है डीजल?

इस डीजल की सप्लाई असम स्थित 'नुमालीगढ़ रिफाइनरी' से की जा रही है। यह ईंधन 'भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन' के जरिए बांग्लादेश के पारबतीपुर डिपो तक भेजा जाता है। साल 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए बड़े जन आंदोलन के बाद इस मैत्री पाइपलाइन का संचालन रोक दिया गया था।

हाल ही में फरवरी में हुए आम चुनावों के बाद, जब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता संभाली, तो इस पाइपलाइन को फिर से बहाल कर दिया गया। फिर से शुरू होने के बाद से अब तक इसी पाइपलाइन के माध्यम से 15,000 टन डीजल भेजा जा चुका है।

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बांग्लादेश में डीजल की मांग और आयात की स्थिति

ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज अहमद ने ANI से बात करते हुए बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की वार्षिक डीजल मांग 40 लाख टन है, जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल में से केवल 5 लाख टन को ही बांग्लादेश की 'ईस्टर्न रिफाइनरी' में रिफाइन किया जा सकता है। बाकी की जरूरत पूरी करने के लिए सीधा रिफाइंड डीजल ही आयात करना पड़ता है। अपनी डीजल आपूर्ति के लिए बांग्लादेश मुख्य रूप से भारत, सिंगापुर और मध्य पूर्व पर निर्भर है।

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