bangladesh pm tarique rahman tribute on 1971 genocide day operation searchlight by Pakistan पाक सेना ने किया था हमारा नरसंहार, पीएम रहमान ने बांग्लादेश को याद दिलाया 'ऑपरेशन सर्चलाइट', International Hindi News - Hindustan
More

पाक सेना ने किया था हमारा नरसंहार, पीएम रहमान ने बांग्लादेश को याद दिलाया 'ऑपरेशन सर्चलाइट'

बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने 25 मार्च 1971 के 'नरसंहार दिवस' पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। जानिए पाकिस्तान के क्रूर 'ऑपरेशन सर्चलाइट' की खौफनाक सच्चाई और अमेरिकी कांग्रेस में नरसंहार को मान्यता देने वाले हालिया प्रस्ताव के बारे में।

Wed, 25 March 2026 06:31 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share
पाक सेना ने किया था हमारा नरसंहार, पीएम रहमान ने बांग्लादेश को याद दिलाया 'ऑपरेशन सर्चलाइट'

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को 'नरसंहार दिवस' के अवसर पर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। यह दिन 25 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना द्वारा मारे गए निर्दोष लोगों की याद में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री रहमान ने याद दिलाया कि कैसे पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर बांग्लादेशियों की बर्बर हत्याएं की थीं। उन्होंने 25 मार्च, 1971 को इतिहास के सबसे शर्मनाक और क्रूर दिनों में से एक करार दिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक लंबी पोस्ट में पीएम रहमान ने लिखा, '25 मार्च, 1971 को 'नरसंहार दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, मैं सभी शहीदों को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आजादी चाहने वाले बांग्लादेश के इतिहास में 25 मार्च 1971 सबसे काले और क्रूर दिनों में से एक है। उस काली रात को, पाकिस्तानी कब्जा करने वाले बलों ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर बांग्लादेश के निहत्थे लोगों के खिलाफ इतिहास का सबसे जघन्य नरसंहार किया था।'

बुद्धिजीवियों और निर्दोषों की हत्या पर जताया रोष

उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तानी सेना ने ढाका विश्वविद्यालय, पिलखाना और राजरबाग पुलिस लाइन्स सहित विभिन्न स्थानों पर शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और निर्दोष नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं जिसमें अनगिनत लोग मारे गए। 25 मार्च के इस नरसंहार को एक 'पूर्व-नियोजित हत्याकांड' बताते हुए रहमान ने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस संगठित हत्या के दौर का विरोध क्यों नहीं किया जा सका, तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व की इसमें क्या भूमिका थी, यह अभी भी ऐतिहासिक शोध का विषय बना हुआ है।

सशस्त्र प्रतिरोध और मुक्ति संग्राम की शुरुआत

रहमान ने लोगों से जान गंवाने वालों के बलिदान का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा- 25 मार्च की रात को ही चट्टोग्राम (चटगांव) में 8वीं ईस्ट बंगाल रेजीमेंट ने 'हम विद्रोह करते हैं' की घोषणा करके इस नरसंहार के खिलाफ औपचारिक रूप से सशस्त्र प्रतिरोध की शुरुआत की थी। इसी प्रतिरोध के जरिए नौ महीने लंबे सशस्त्र 'मुक्ति संग्राम' की शुरुआत हुई।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के मूल्य और महत्व को वर्तमान और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए 25 मार्च के नरसंहार के बारे में जानना बेहद जरूरी है। उन्होंने देशवासियों से राज्य और समाज में समानता, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय (जो कि महान मुक्ति संग्राम की मूल भावना थी) स्थापित करने का प्रयास करने को कहा।

एक विकसित और लोकतांत्रिक बांग्लादेश का आह्वान

नागरिकों से एक न्यायपूर्ण, विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश के निर्माण का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा- आइए हम सब मिलकर काम करें। मैं सर्वशक्तिमान अल्लाह से प्रार्थना करता हूं कि वह सभी शहीदों की दिवंगत आत्माओं को क्षमा और शाश्वत शांति प्रदान करें। 25 मार्च को 'नरसंहार दिवस' के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों की मैं सफलता की कामना करता हूं।

अमेरिकी कांग्रेस में पेश प्रस्ताव का स्वागत

इस बीच, धार्मिक भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले मानवाधिकार संगठन 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए एक प्रस्ताव का गर्मजोशी से स्वागत किया है। यह प्रस्ताव 20 मार्च को सांसद ग्रेग लैंड्समैन द्वारा 119वीं कांग्रेस के दूसरे सत्र में पेश किया गया था। इस प्रस्ताव में 1971 के महान मुक्ति संग्राम के दौरान बांग्लादेश में हुए 'नरसंहार' को आधिकारिक मान्यता देने की मांग की गई है।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।