जब इजरायल के पास परमाणु हैं, तो ईरान क्यों नहीं रख सकता; अलग कानून की एक वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, परमाणु हथियार रखने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य हैं, जिन्होंने संबंधित संधियों जैसे एनपीटी या 2017 की परमाणु हथियार निषेध संधि को स्वीकार किया है।

हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताओं के बीच यह सवाल फिर से चर्चा में है कि इजरायल के पास परमाणु हथियार क्यों हैं, जबकि ईरान को इन्हें हासिल करने से कानूनी रूप से रोका गया है। यह मुद्दा अक्सर 'दोहरा मापदंड' के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह अंतरराष्ट्रीय कानून की संरचना से जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून मूल रूप से राज्यों की सहमति पर आधारित व्यवस्था है, जो उनकी संप्रभुता से निकलती है। इसी सिद्धांत के तहत परमाणु हथियारों को रखना या त्यागना किसी भी देश का संप्रभु निर्णय होता है। यानी कोई भी राज्य तभी अपने सैन्य अधिकारों को सीमित करता है, जब वह स्वयं इसके लिए सहमत हो। यह सिद्धांत 1968 की परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
क्या है NPT अंतरराष्ट्रीय कानून
एनपीटी अंतरराष्ट्रीय कानून में सामूहिक सुरक्षा के स्तंभों में से एक है। इसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है – विशेष रूप से अन्य देशों तक – ताकि परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा दिया जा सके, और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित तथा शांतिपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके। इस संधि के तहत दुनिया को परमाणु हथियार संपन्न देशों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन) और गैर-परमाणु हथियार देशों में बांटा गया है।
कैसे बंटे देश
संधि के अनुसार, एक जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण करने वाले देशों को परमाणु हथियार संपन्न माना गया, जबकि अन्य देशों ने ऐसे हथियार न रखने की प्रतिबद्धता जताई। इस व्यवस्था में गैर-परमाणु संपन्न देशों पर हथियार हासिल न करने का दायित्व है, जबकि परमाणु संपन्न देशों पर उन्हें स्थानांतरित न करने की जिम्मेदारी है।
क्यों परमाणु हथियार नहीं बना सकता ईरान
ईरान 1970 से एनपीटी का सदस्य है, इसलिए वह एक गैर-परमाणु देश के रूप में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकता। साथ ही उसका परमाणु कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में आता है।
इजरायल पर क्यों लागू नहीं होता कानून
इसके विपरीत, इजरायल एनपीटी का सदस्य नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांत के अनुसार, कोई भी देश उस संधि के नियमों से बाध्य नहीं होता, जिसका वह पक्षकार नहीं है। इसलिए इजरायल पर एनपीटी के तहत परमाणु हथियारों से जुड़ी कानूनी बाध्यता लागू नहीं होती।
इसी कारण दोनों देशों के बीच कानूनी स्थिति अलग है। यह अंतर किसी विसंगति से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून की संरचना को दर्शाता है, जहां कुछ देश संधियों के तहत प्रतिबद्ध हैं और कुछ नहीं। इजरायल के अलावा भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया जैसे देश भी एनपीटी के बाहर परमाणु क्षमता रखते हैं।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, परमाणु हथियार रखने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। केवल वे देश ही बाध्य हैं, जिन्होंने संबंधित संधियों जैसे एनपीटी या 2017 की परमाणु हथियार निषेध संधि को स्वीकार किया है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी 1986 के एक फैसले में कहा था कि किसी देश के हथियारों के स्तर को सीमित करने के लिए वही नियम लागू होते हैं, जिन्हें वह स्वयं स्वीकार करता है। इस तरह ईरान और इजरायल के बीच अंतर कानूनी विरोधाभास नहीं, बल्कि संप्रभु सहमति पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का परिणाम है।
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