युद्ध के बीच तेहरान की 'बंकर' में प्लानिंग, ईरान की 'सीक्रेट' कैबिनेट मीटिंग में क्या तय हुआ?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान अपनी कैबिनेट की बैठक बंकर-शैली की अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत सुविधा में आयोजित की। सरकारी मीडिया ने सोमवार को बैठक की तस्वीरें जारी कीं, जिनमें ईरानी मंत्री एक मजबूत कंक्रीट दीवारों वाले सुरक्षित हॉल में बैठे दिख रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान अपनी कैबिनेट की बैठक बंकर-शैली की अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत सुविधा में आयोजित की। सरकारी मीडिया ने सोमवार को बैठक की तस्वीरें जारी कीं, जिनमें ईरानी मंत्री एक मजबूत कंक्रीट दीवारों वाले सुरक्षित हॉल में बैठे दिख रहे हैं। ईरानी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस बैठक को अत्यधिक संरक्षित स्थान पर बुलाया। तस्वीरों में मंत्री नियंत्रित वातावरण वाले बंकर-जैसी व्यवस्था में बैठकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, ईरान के सरकारी मीडिया ने फारसी नव वर्ष (नौरोज) के अवसर पर कैबिनेट की पहली बैठक की तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें मंत्री एक किलेबंद बंकर जैसी संरचना में बैठे दिखाई दे रहे हैं। सरकारी चैनलों द्वारा साझा की गई इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तीखी चर्चा छेड़ दी है। कई यूजर्स ने इसे देश में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं और युद्धकालीन तैयारियों का संकेत माना है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने बैठक के स्थान या सुरक्षा व्यवस्था के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। तस्वीरों से साफ संकेत मिलता है कि सरकार संभावित खतरों के बीच कामकाज जारी रखे हुए है।
अमेरिका से प्रत्यक्ष वार्ता नहीं
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान ने अब तक अमेरिका के साथ कोई 'प्रत्यक्ष' वार्ता नहीं की है, हालांकि मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत की अमेरिकी इच्छा से जुड़े संदेश उसे प्राप्त हुए हैं। बघाई ने सोमवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा कि जब अमेरिका वार्ता और कूटनीति की बात करता है तो संवेदनशीलता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि स्वयं अमेरिका के भीतर भी इन दावों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के कूटनीतिक दावों पर भरोसा सीमित है।
बघाई ने कहा कि ईरान का रुख स्पष्ट और स्थिर रहा है, जबकि 'दूसरी तरफ' दूसरा पक्ष बार-बार अपना रुख बदलता रहा है और विरोधाभासी बयान देता रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान तक जो प्रस्ताव पहुंचे हैं, चाहे उन्हें 15 सूत्रीय योजना कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाये, उनमें 'अत्यधिक, अव्यावहारिक और तर्कहीन' मांगें शामिल हैं।
बघाई ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने शनिवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मेजबानी में हुई चार पक्षीय बैठक में भाग नहीं लिया, जिसमें सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हुए थे। उन्होंने क्षेत्रीय और पड़ोसी देशों की शांति और सुरक्षा को लेकर चिंता की सराहना करते हुए कहा कि युद्ध पर चर्चा करते समय यह देखना आवश्यक है कि संघर्ष की शुरुआत किस पक्ष ने की।
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