रूस के नाम पर नाटो में ही कलह, एक देश पर मीटिंग के बीच जासूसी का आरोप; यूरोप में हलचल
पोलैंड के प्राइम मिनिस्टर डोनाल्ड टस्क ने आशंका जताई कि हंगरी की विक्टर ओरबान की सरकार की ओर से जरूरी जानकारियां रूस के साथ शेयर की जा रही हैं। Politico की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ ने ऐसी आशंकाओं को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन संघ के दूसरे देश चुपचाप ही दूरी बरतने में जुटे हैं।

यूरोपियन यूनियन के देशों में रूस के चलते मतभेद पैदा हो गए हैं। यूरोपियन यूनियन को आशंका है कि हंगरी की ओर से संवेदनशील जानकारियां रूस को लीक की जा रही हैं। इसके चलते हंगरी से यूरोपीय संघ के दूसरे देश दूरी बरत रहे हैं। यह पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब पोलैंड के प्राइम मिनिस्टर डोनाल्ड टस्क ने आशंका जताई कि हंगरी की विक्टर ओरबान की सरकार की ओर से जरूरी जानकारियां रूस के साथ शेयर की जा रही हैं। Politico की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय संघ ने ऐसी आशंकाओं को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन संघ के दूसरे देश चुपचाप ही दूरी बरतने में जुटे हैं।
हंगरी की सरकार का कहना है कि यह पूरा मामला उनके देश में होने वाले चुनाव से जुड़ा है। हंगरी में 12 अप्रैल को संसदीय चुनाव होने वाले हैं। पोलैंड के प्राइम मिनिस्टर डोनाल्ड टस्क ने कहा, 'यह खबर आना कि ओरबान के लोग मॉस्को के साथ जानकारी शेयर कर रहे हैं। इसमें कुछ भी आश्चर्य नहीं है। ऐसा संभव है कि यूरोपियन यूनियन की बैठकों के बारे में जानकारी मॉस्को को दी जा रही हो।' डोनाल्ड टस्क के इस दावे पर हंगरी इसलिए सवाल उठा रहा है क्योंकि उसका कहना है कि पोलैंड के पीएम उनके यहां के विपक्षी नेताओं का समर्थन करते हैं। यही नहीं डोनाल्ड टस्क ने जवाब देते हुए यहां तक कहा कि हमें तो उनकी ही मंशा पर संदेह है।
दरअसल इस मामले ने जोर तब पकड़ा, जब शनिवार को वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ओरबान की सरकार के मॉस्को के साथ करीबी संबंध हैं। यही नहीं दावा किया गया कि हंगरी के विदेश मंत्री पीटर जिजारतो अकसर यूरोपियन यूनियन की मीटिंग्स में ब्रेक लिया करते थे। इस दौरान समय निकालकर वह रूस के विदेश मंत्री सेरजेई लावरोव से बात करते थे और उन्हें संवेदनशील जानकारियां देते थे। इस दावे के बाद विवाद और बढ़ा तो कहा गया कि हंगरी के नेता के रूस से अच्छे रिश्ते रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद यूरोपियन यूनियन में खलबली मच गई है और हंगरी को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
नाटो और EU दोनों का हिस्सा है हंगरी, फिर भी विवाद
दिलचस्प बात यह है कि हंगरी उस नाटो संगठन का हिस्सा है, जिसे रूस अपने दुश्मन के तौर पर देखता रहा है। ऐसे में उस संगठन का कोई देश यदि रूस के करीब आता है तो वह उसके लिए एक बड़ी कामयाबी है। इसके अलावा हंगरी यूरोपियन यूनियन के भी 27 देशों में से एक है। स्पष्ट है कि दो संगठनों का अहम हिस्सा हंगरी यदि पाला बदलता दिख रहा है तो हलचल होना लाजिमी है।
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