ईरान जंग में NATO की एंट्री? तुर्की की ओर दागी बैलिस्टिक मिसाइल दूसरी बार समंदर में गिराई
इससे पहले 4 मार्च को भी इसी प्रकार की एक मिसाइल को रोक लिया गया था। उस घटना के बाद NATO ने क्षेत्र में अपनी मिसाइल-रोधी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया था।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आई है। North Atlantic Treaty Organization (NATO) ने सोमवार को ईरान से तुर्की की दिशा में दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर भूमध्य सागर में गिराकर नष्ट कर दिया। इस घटना ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका को बढ़ा दिया है। अब इस बात की चर्चा होने लगी है कि क्या NATO भी इस जंग में कूद चुका है क्योंकि इससे पहले भी 4 मार्च को ऐसी ही एक मिसाइल रोकी गई थी। फिलहाल NATO के इस कदम से यह खतरा बढ़ गया है कि मिलिट्री अलायंस मिडिल ईस्ट में संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हो सकता है।
तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया, लेकिन हथियारों का मलबा दक्षिणी तुर्की के गाज़ियांटेप प्रांत में गिरा, जो इनसिरलिक एयर बेस से लगभग 150 किलोमीटर (93 मील) दूर है, जहाँ अमेरिकी सेना के सैकड़ों जवान तैनात हैं। माना जाता है कि US के नसिरलिक एयर बेस पर न्यूक्लियर हथियार रखे हैं,जो कुरेसिक में NATO के एडवांस्ड रडार सिस्टम से लगभग 200 किलोमीटर दूर है, जिसका इस्तेमाल टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को सपोर्ट करने के लिए किया जाता है।
4 मार्च को भी इसी तरह एक मिसाइल गिराई
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 4 मार्च को भी इसी प्रकार की एक मिसाइल को रोक लिया गया था। उस घटना के बाद NATO ने क्षेत्र में अपनी मिसाइल-रोधी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया था। तुर्की में स्थित Kurecik Radar Base NATO की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा है। यह रडार प्रणाली Terminal High Altitude Area Defense (THAAD) जैसे उन्नत एंटी-मिसाइल सिस्टम को आवश्यक जानकारी प्रदान करती है।
अंकारा ने तेहरान को चेतावनी भी दी
तुर्की सरकार ने अब तक अपने सैन्य अड्डों या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं होने दिया है। पहली घटना के बाद अंकारा ने तेहरान को चेतावनी भी दी थी कि ऐसे कदम क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुर्की के किसी सैन्य ठिकाने या NATO के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचता, तो NATO को सीधे इस संघर्ष में उतरना पड़ सकता था। इस कारण यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप ले सकता है
इधर ईरान की आंतरिक स्थिति भी अनिश्चित बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार हालिया अमेरिकी और इजराइली हमलों में कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडरों के मारे जाने के बाद निर्णय-प्रक्रिया निचले स्तर के अधिकारियों के हाथ में आ गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का नाम भी इन घटनाओं के संदर्भ में चर्चा में रहा है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस प्रकार की घटनाएं जारी रहती हैं, तो मध्य-पूर्व का यह संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप ले सकता है। फिलहाल NATO और तुर्की दोनों ही स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।
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