खामेनेई की मौत पर हमास ने जताया दुख, कहा- उन्होंने हमारा बहुत साथ दिया
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर हमास ने दुख व्यक्त किया है। हमास की तरफ से जारी बयान में कहा कि खामेनेई ने लगातार उनकी मदद की है। उनके ऊपर किया गया यह हमला इजरायल और अमेरिका के घृणित चेहरे को दिखाता है।
इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो चुकी है। उनकी मौत पर शिया समुदाय के लोग लगातार अपना दुख जाहिर कर रहे हैं। फलस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने भी उनकी मौत पर अपना दुख जाहिर किया है। हमास ने रविवार को जारी किए गए एक बयान में दुख व्यक्त करते हुए इसे अमेरिकी और इजरायल के घृणित हमले का परिणाम बताया।
हमास ने बयान जारी करके कहा, "हम हमास में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं। उन्होंने हमारे लोगों, हमारे मकसद और हमारे प्रतिरोध को हर तरह का राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य समर्थन प्रदान किया। अमेरिका और फासीवादी कब्जे वाली सरकार (इजरायल) द्वारा इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता के खिलाफ इस खुली आक्रामकता का हम विरोध करते हैं। इस घृणित अपराध के साथ-साथ क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर इसके गंभीर परिणामों के लिए अमेरिका और वह फासीवादी कब्जे वाली सरकार पूरी तरह जिम्मेदार हैं।”
हमास की एक शाखा कसिम ब्रिगेड़ ने खामेनेई को “रेजिस्टेंस एक्सिस और उसके मुजाहिदीन का मुख्य समर्थक” बताया। एक अलग से बयान जारी करते हुए ब्रिगेड्स ने कहा, "इस्लामी गणराज्य ईरान ने दशकों से हमारे लोगों और हमारे फासीवादी सरकार के खिलाफ हमारे प्रतिरोध को जो भी समर्थन दिया, वह हमेशा याद रखा जाएगा। यह पूरी मदद उनके सीधे निर्णय और पूर्ण निगरानी में किया गया था।
हमास ने कहा कि ईरान द्वारा दी गई यह मदद हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुई। उनकी रणनीतियों की वजह से ही हम 7 अक्तूबर को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त कर पाए थे। इसके अलावा फिलिस्तीन के एक और संगठन इस्लामिक जिहाद ने भी खामेनेई की हत्या को अमेरिका और यहूदी देश द्वारा किया गया युद्ध अपराध करार दिया।
गौरतलब है कि ईरान काफी पहले से फिलिस्तीन के हमास, लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हूतियों को आर्थिक, राजनैतिक मदद देता आ रहा है। अमेरिका और इजरायल की तरफ से भी कई बार ईरान को इसके लिए दोषी करार दिया जाता रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए कई प्रतिबंधों के बाद भी ईरान ने कभी इन इस्लामिक संगठनों की मदद करना नहीं रोका। यही वजह है कि पिछले साल 12 दिन की लड़ाई में इजरायल ने मुख्य रूप से ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला बोला था। इजरायल का आरोप था कि ईरान के जरिए हथियार हमास और अन्य आतंकवादी संगठनों तक पहुंच रहे हैं।
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