बमबारी के बाद सोकर उठा, तब से बोल नहीं पाया; गाजा में आवाज क्यों खो रहे बच्चे
गाजा शहर के हमाद अस्पताल में डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में बोलने की शक्ति खोने के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल के स्पीच डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. मूसा अल-खोरती ने बताया कि कुछ मामलों में कि बच्चा पूरी तरह से बोलने की क्षमता खो सकता है।

इजरायल और हमास के बीच गाजा पट्टी पर कई सालों से चल रहा संघर्ष अब भी जारी है। इस युद्ध की चपेट में बड़ी संख्या में बच्चे भी आए हैं, जो चोटों या फिर मानसिक आघात की वजह से बोल तक नहीं पा रहे। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि गाजा में न बोल पाने वाले बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इजरायल ने गाजा में भयंकर बमबारी की है। उसका दावा है कि वह हमास के लड़ाकों को मार रहा है, लेकिन इसकी चपेट में आम लोग भी आ रहे हैं। कई इलाके पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं और वहां सिर्फ मलबे ही मलबे दिखाई दे रहे।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में भारी बमबारी के बाद कुछ बच्चों को शारीरिक चुनौतियां भी झेलनी पड़ी हैं। बच्चों में सिर की चोटें या धमाके से होने वाले आघात (ब्लास्ट ट्रॉमा) जैसे मामले सामने आए हैं। बच्चों की मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लैट्ज ब्रुबैक, जिन्होंने 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' के साथ दो बार गाजा में काम किया है, इसे साइलेंट सफरिंग बताती हैं, जो अक्सर तबाही के बड़े पैमाने के नीचे छिपी रह जाती है।
गाजा शहर के हमाद अस्पताल में डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में बोलने की शक्ति खोने के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल के स्पीच डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. मूसा अल-खोरती ने बताया कि कुछ मामलों में, "बच्चा पूरी तरह से बोलने की क्षमता खो सकता है।" उनका इशारा सेलेक्टिव म्यूटिज्म या हिस्टेरिकल एफोनिया जैसी स्थितियों की ओर था, जिसमें अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण आवाज चली जाती है। ये मामले अलग-अलग तरह के होते हैं, लेकिन कई मामलों में एक जैसा पैटर्न देखने को मिलता है- हिंसा या चोट लगने के बाद अचानक बोलने की शक्ति का चले जाना।
'धमाके के बाद सोकर उठा, तब से नहीं बोल पाया'
जाद की मां ने बताया कि पांच साल के जाद को पहले बोलने में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उसके घर के पास हुई बमबारी के बाद जब वह सोकर उठा, तो वह बोल नहीं पा रहा था, वह कोई आवाज या शब्द नहीं निकाल पा रहा था। जाद अकेला नहीं है। चार साल की लुसीन ताम्बोरा की आवाज तब चली गई, जब वह अपने घर की तीसरी मंजिल से नीचे गिर गई। दरअसल, एक इजरायली हवाई हमले में क्षतिग्रस्त हुई सीढ़ी उसके नीचे ही टूट गई थी।
क्यों बोलना बंद कर रहे बच्चे?
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लगातार देखभाल के अभाव में, इन स्थितियों का विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है, विशेष रूप से तब, जब ये मनोवैज्ञानिक आघात से जुड़ी हों। ऐसा हो क्यों रहा है, इसकी भी डॉक्टरों ने वजह बताई है। बच्चों की मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लैट्ज ब्रुबैक कहती हैं कि बहुत ज्यादा सदमे की वजह से बच्चे बोलना बंद कर देते हैं। उन्होंने कहा, "ये ऐसे बच्चे हैं जिन्हें बहुत ज्यादा सदमा लगा है और बिना किसी मेडिकल वजह के, वे बोलना बंद कर देते हैं। यह हमेशा बहुत ज्यादा सदमे की वजह से होता है।"
फ्रीज रिस्पॉन्स में चले जाते हैं बच्चे
वे ऐसे बच्चों के बारे में बताती हैं जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को खोया है, मौत को अपनी आंखों से देखा है, घायल हुए हैं, या बार-बार हिंसा का सामना किया है। ऐसी स्थितियों में, चुप रहना ही उनके लिए हालात से निपटने का एकमात्र तरीका बन जाता है। वह कहती हैं, "एक समय ऐसा आता है जब दुनिया पूरी तरह से अप्रत्याशित लगने लगती है, और बच्चा बहुत ज्यादा खतरे में होता है। यह कोई चुनाव नहीं है। यह शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।'' कई बच्चे उस स्थिति में चले जाते हैं जिसे वे फ्रीज रिस्पॉन्स (जम जाने की प्रतिक्रिया) कहती हैं। इस स्थिति में, खतरा महसूस होने पर शरीर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है।
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