न सैनिक, न मिसाइल; पहली बार रूसी सैनिकों ने ऐसे डाले हथियार; अजूबा क्यों ये सरेंडर?
जेलेंस्की ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कल रात, रूस ने एक विशाल संयुक्त हमला किया जो लगभग 10 घंटे तक चला। बैलिस्टिक मिसाइलों सहित 18 मिसाइलों और लगभग 400 हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया उनमें से लगभग 200 शाहेड थे।

पिछले करीब साढ़े तीन साल से रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। रूस ने बुधवार रात भी लगातार दूसरे दिन यूक्रेन की राजधानी कीव पर 700 से ज़्यादा ड्रोन दागकर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। रूस के इस हवाई हमले के बाद उत्तरी अटंलाटिक संधि संगठन (नाटो) के लड़ाकू विमानों को पोलैंड के हवाई क्षेत्र में आना पड़ा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि इस बड़े रूसी हमले में ''विभिन्न प्रकार के 728 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था जिनमें 300 से ज़्यादा शाहेड और 13 किंजल मिसाइलें और इस्कैंडर्स शामिल थीं।''
इस बीच, यूक्रेन के सशस्त्र बलों की तीसरी आक्रमण ब्रिगेड ने दावा किया है कि इतिहास में पहली बार रूसी सेना के जवानों ने यूक्रेनी पैदल सेना की भागीदारी के बिना यूक्रेन के सामने समर्पण कर दिया है। ब्रिगेड के दावे के मुताबिक, ऐसा यूक्रेनी लड़ाकू रोबोटों के कारण संभव हो सका है, जिसने जमीनी ऑपरेशन के दौरान रूसी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए।
अभूतपूर्व था अभियान
यूक्रेनी फाइटर ब्रिगेड ने कहा है कि उसने एक अभूतपूर्व अभियान चलाया था, जिसमें ना तो तोप, ना ही मिसाइलें और ना ही जमीनी सैनिक शामिल थे बल्कि उस अभियान में सिर्फ ड्रोन और जमीनी लड़ाकू रोबोटों को शामिल किया गया था। दावे के मुताबिक, खार्किव क्षेत्र में दुश्मन के गढ़ वाले ठिकानों को रूसी सैनिकों से मुक्त करा लिया गया। इस दौरान दुश्मन की किलेबंदी को एफपीवी ड्रोन्स और कामिकेज़ ज़मीनी रोबोटिक प्लेटफ़ॉर्म के जरिए निशाना बनाया गया।
ब्रिगेड ने अभियान का वीडियो भी जारी किया
यूक्रेनी फाइटर ब्रिगेड ने इस अभियान का एक वीडियो भी जारी किया है। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है, "जैसे ही एक और रोबोट नष्ट हो चुके डगआउट के पास पहुंचा, दुश्मन ने विस्फोट से बचने के लिए सरेंडर करने की घोषणा कर दी। इसके बाद बचे हुए कब्ज़ेदारों को ड्रोन द्वारा हमारी सीमा तक लाया गया और प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें युद्ध बंदी बना लिया गया।"
मीडिया आउटलेट RBC यूक्रेन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियान के तहत जो रूसी सैनिक बच गए, उन्हें ड्रोन की मदद से यूक्रेनी ठिकानों तक युद्धबंदी की तरह ले जाया गया और फिर सैन्य नियमों के अनुसार उन्हें भी बंदी बना लिया गया। ब्रिगेड ने बताया कि सुसंगठित आक्रामक कार्रवाइयों की बदौलत, साफ की गई किलेबंदी और वन क्षेत्र को यूक्रेनी सशस्त्र बलों की इकाइयों ने फिर से अपने कब्जे में कर लिया।
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