6 attempts failed in six months, image also damaged; Why Donald Trump Attitude Changing on Ukraine took U turn छह महीने में 6 कोशिश नाकाम, इमेज को भी नुकसान; यूं ही ट्रंप ने यूक्रेन पर नहीं लिया यू टर्न, International Hindi News - Hindustan
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छह महीने में 6 कोशिश नाकाम, इमेज को भी नुकसान; यूं ही ट्रंप ने यूक्रेन पर नहीं लिया यू टर्न

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि पिछले सप्ताह रूस ने यूक्रेन पर लगभग 1,270 ड्रोन, 39 मिसाइल और 1,000 शक्तिशाली ग्लाइड बम दागे हैं। ट्रंप ने रूस की इस हरकत का संज्ञान लेते हुए यूक्रेन को फिर से हथियार देने का फैसला किया है।

Wed, 9 July 2025 05:44 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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छह महीने में 6 कोशिश नाकाम, इमेज को भी नुकसान; यूं ही ट्रंप ने यूक्रेन पर नहीं लिया यू टर्न

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उनका देश फिर से यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति शुरू करने जा रहा है। उनका यह बयान पेंटागन द्वारा यूक्रेन को हथियार सप्लाई रोके जाने के कुछ दिनों बाद आया है। दरअसल, हफ्ते भर पहले पेंटागन ने हथियारों के कम भंडार का हवाला देते हुए यूक्रेन को कुछ हथियारों की डिलीवरी रोक दी थी। ‘पेंटागन’ ने कहा था कि वह यूक्रेन को हवाई हमलों से बचाव करने वालीं मिसाइलें, सटीक निशाना लगाने वालीं तोपें जैसे कुछ हथियार भेजना फिलहाल रोक रहा है लेकिन अब ट्रंप का ताजा बयान उनके अचानक बदले रुख को दर्शाता है।

यूक्रेन को और हथियार भेजने के सवाल पर ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमें ऐसा करना ही होगा। उन्हें अपनी रक्षा करने में सक्षम बनाना होगा।’’ डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कीव को फिर से हथियार भेजने के वादे ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा शुरू किए गए यूक्रेन युद्ध के प्रति अब ट्रंप का दृष्टिकोण बदल गया है और इस बदलाव के पीछे क्या वजह हैं?

छह बार पुतिन से बात, फिर भी नाकाम

दरअसल, इस साल जनवरी में ट्रंप जब दोबारा राष्ट्रपति बनकर वाइट हाउस पहुंचे थे तो वह पारंपरिक ट्रैक से हटते हुए मॉस्को के साथ बेहतर संबंधों की ओर बढ़ने लगे थे। वैश्विक शांति दूत का सपना संजोए ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिशें भी कीं। इसके लिए उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की पर भारी दबाव बनाया। फिर छह महीने की इस अवधि में ट्रंप ने छह बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की। ताकि यूक्रेन-रूस के बीच सीजफायर हो सके लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।

वैश्विक प्रतिष्ठा को भी नुकसान

पिछले सप्ताह भी ट्रंप ने पुतिन को फोन किया था लेकिन पुतिन से ट्रंप को निराशा हाथ लगी। इसके बाद ट्रंप के रुख में बदलाव आना शुरू हो गया। 3 जुलाई को पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने खुले तौर पर कहा था कि वह पुतिन से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने दीर्घकालिक शांति के लिए वह सीजफायर के लिए तैयार नहीं हुए और दूसरी तरफ यूक्रेन पर हमलों में बढ़ोत्तरी भी कर दी। रूसी राष्ट्रपति के झटके से ट्रंप की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी धक्का लगा है, जिन्होंने दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ लेते ही युद्ध को रुकवाने का वादा किया था। ट्रंप सभी जगह युद्ध रुकवाने का श्रेय लेते रहे हैं लेकिन यूक्रेन-रूस युद्ध में उन्हें निराशा हाथ लगी है।

पुतिन पर बहुत नरम थे ट्रंप

एक भू-राजनीतिक विशेषज्ञ के हवाले से न्यूज़वीक की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप की टिप्पणी युद्ध को जल्दी से हल न कर पाने के गुस्से से उपजी है। एक अन्य ने कहा कि ट्रंप पेंटागन को जवाबदेह ठहरा रहे हैं, जिसने राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना ही यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई रोकने का फैसला लिया था। ट्रंप की इस बात के लिए भी आलोचना हो रही थी क्योंकि उन्होंने पुतिन के प्रति अधिक लचीला रुख अपना रखा था लेकिन पुतिन ट्रंप की बातों में नहीं आए।

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यूक्रेन को 10 पैट्रिएट इंटरसेप्टर भेजने का फैसला

ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने अब यूक्रेन को अपने नागरिकों और अन्य ठिकानों की सुरक्षा करने के लिए अधिक से अधिक हथियार देने का फैसला किया है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यूक्रेन को 10 पैट्रिएट इंटरसेप्टर और अन्य हथियार भेजने का फैसला किया है। होप फॉर यूक्रेन के सीईओ और संस्थापक यूरी बोयेचको के मुताबिक पुतिन के साथ ट्रंप की बातचीत से पहले हथियारों पर रोक लगाना रूसी नेता को खुश करने के लिए वाइट हाउस द्वारा जानबूझकर उठाया गया कदम था। बोयेचको ने कहा कि हथियारों की आपूर्ति रोककर ट्रंप पुतिन को यह दिखाना चाहते थे कि अगर वह अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हो जाएँ, तो अमेरिका यूक्रेन को निरस्त्र करने के लिए तैयार है।

हालांकि, जब पुतिन ने स्पष्ट कर दिया कि मॉस्को अपने युद्ध लक्ष्यों को पूरा करने तक नहीं रुकेगा, तो ट्रंप ने इसे "पुतिन द्वारा अपना अनादर" माना, और अब यूक्रेन को फिर से हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी है। नोवा स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स में रणनीति के प्रोफेसर एंटोनियो अल्वारेंगा ने कहा कि ट्रम्प-पुतिन के रिश्ते में नरमी आई है और यह बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि ट्रम्प ने स्वीकार कर लिया है कि केवल बातचीत से पुतिन को रोका नहीं जा सकेगा और ठोस सैन्य समर्थन अब जरूरी हो गया है।

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